वक्तिगत खुन्नस के चलते BSA भूले राष्ट्र प्रेम और लोकतंत्र का कर रहे अपमान

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रायबरेली : बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जुगाड़ से लगाये गये सीसीटीवी कैमरों ने दो अधिकारियों के बीच गहरी खाई खींच दी है। इस प्रकरण ने इतना तूल पकड़ा कि भन्नाये बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपने दायित्वों के निर्वहन में भी उदाशीनता बरती यहां तक कि उन्होंने राष्ट्र प्रेम तक को तिलान्जलि दे दी।

लगभग दो वर्ष पूर्व तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं सहायक वित लेखाधिकारी ने कार्यालय में पारदर्शिता के नाम पर किसी जुगाड़ से सीसी कैमरे लगवाये थे, इसी बीच दोनों अधिकारियों का गैरजनपद स्थानान्तरण हो गया । नये सहायक वित लेखाधिकारी ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद जब फाइलों का अवलोकन किया तो सीसी कैमरें से संबंधित उन्हें कोई फाइल नही मिली। जिस पर उन्होंने कैमरों को नियम विरूद्ध मानते हुए कैमरे हटवा दिये। कार्यालय से कैमरें हटाये जाने पर सूचना का अधिकार कानून के तहत एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने बेसिक शिक्षाअधिकारी से जानकारी मांग ली। जिस पर बीएसए ने सहायक लेखाधिकारी को संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही कैमरों को यथास्थान लगावाने के निर्देश दिये। ऐसा न करने पर उन्होंने विभागीय कारवाई तक की धमकी दे डाली। चेतावनी पत्र मिलने पर सहायक लेखाधिकारी ने स्पष्टीकरण के रूप में कानून के पेंच उछाल दिये। उन्होंने बीएसए से पूछा कि किस विभागीय आदेश के तहत कैमरे लगवाये गये थे । कैमरें लगवाने के आदेश किसने दिया था । कैमरे लगवाने में किस मत से धनराशि का भुगतान किया गया ।

उन्होंने यहां तक कह डाला कि बिना किसी आदेश के सरकारी कार्यालय में कैमरे लगवाना नियम विरूद्ध है। उन्होंने इस प्रकरण में वित्तीय कदाचार अथवा धन के दुरूप्योग की आशंका जताते हुए परियोजना निदेशक को गोपनीय पत्र भेंजकर प्रकरण के जांच की मांग भी कर डाली। सहायक लेखधिकारी के इन कानूनी दांवा पेचों से बीएसए भन्ना गये पहले तो क्षुब्ध बीएसए ने शासन के निर्देश के बावजूद कार्यालय कर्मियों को मतदाता शपथ नही दिलायी। फिर गणतंत्र दिवस के झंडारोहण समारोह में अपने बगल में खड़े सहायक लेखाधिकारी को देखकर हत्थे से उखड़ गये । फरमान सुनाया कि जाओं झंडा रोहण कर दो। साथ ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से कहा कि सबको मिठाई खिला दो और घर जाओं । आपसी खुन्नस के चलते गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उन्होंने परिपाटी तोड़ते हुए राष्ट्र प्रेम पर न तो स्वयं ही दो शब्द कहे न ही किसी अन्य को बोलने का मौका दिया। बीएसए की यह तुनक मिजाजी विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है।

रिपोर्ट – राजेश यादव

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