बीएसए तो गए, अब बाबू पर कब गिरेगी गाज

उरई/जालौन (ब्यूरो)- नियमों को ताक पर रखकर हुए 42 शिक्षकों के मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी पर कार्रवाई तो हो गई, पर सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस पूरे घपले में केवल बीएसए ही शामिल थे या अन्य कोई विभागीय कर्मचारी भी था। बताया तो यह जा रहा है कि बीएसए आॅफिस का एक विवादित बाबू भी इसमें शामिल रहा है। जिस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। जिसके चलते अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर उक्त बाबू पर कब गाज गिरेगी!

गौरतलब है कि विगत सपा सरकार द्वारा जिले में शिक्षकों के समायोजन के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। जिसमें छात्रों के अनुपात में शिक्षकों का समायोजन किया जाना था। पर बेसिक शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार ओझा ने सभी नियम कायदों को ठेंगे पर रखते हुए मनमाने ढंग से शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया था। आरोप यह लगे थे कि बीएसए द्वारा एक-एक लाख रुपए लेकर शिक्षकों को उनकी मनचाही जगहों पर तैनाती दे दी गई है। जिसके चलते करीब दो दर्जन विद्यालय एकल हो गए थे और कई विद्यालयों में मानक से अधिक शिक्षक तैनात कर दिए गए थे।

इस मामले को दैनिक भास्कर द्वारा प्रमुखता से उठाया गया। जिसके चलते जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने जिला स्तर पर दो सदस्यीय कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई। जिसमें यह मामला सही पाया गया। इसके बाद जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। शुक्रवार को शासन द्वारा बीएसए कमलेश कुमार ओझा को निलंबित कर दिया गया। स्थानांतरण में मनमानी पर बीएसए को निलंबित हो गए, पर सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस पूरे घपले में केवल बीएसए अकेले थे या और भी कोई शामिल था! बताया जा रहा है कि बीएसए आॅफिस में तैनात बाबू त्रिलोकी की भी इस पूरे प्रकरण में भूमिका अहम रही है। अपनी कार्यशैली को लेकर वह हमेशा चर्चा में रहते हैं।

बीते दिनों वह छुट्टी के दिन कार्यालय में बैठकर बैकडेट के ज्वाइनिंग लेटर बांट रहे थे। तब सदर विधायक ने सूचना मिलने पर मौके पर जाकर देखा तो उक्त मामला सही पाया था। उन्होंने उक्त बाबू पर कार्रवाई कराए जाने की बात कही थी। पर अदृश्य कारणों के चलते सदर विधायक नरम हो गए। जिसके चलते उक्त बाबू अभी भी अपने पटल पर जमा हुआ है। शिक्षकों के स्थानांतरण मामले में बीएसए पर कार्रवाई होने के बाद अब इसे लेकर लोगों की निगाहें लगी हुई हैं कि आखिर उक्त बाबू व अन्य लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

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