बुलंदशहर हिंसा : कब, क्या और कैसे

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बुलंदशहर : सैकड़ों की भीड़ गुस्सा, हिंसा और क़त्ल, क़त्ल मनुष्यता का, क़त्ल कानून का, क़त्ल सामाजिकता का एक बार फिर उत्तर प्रदेश की धरती इस भयावह हिंसा की गवाह बन गयी, जीवन बचाने की ठेका लेने वाली भीड़ दो इंसानों की कातिल बन गयी


बुलंदशहर में सोमवार को हुए भीषण और हिंसक मोब लिंचिंग मे खुद को गौरक्षक कहने वाले दो जिंदगियों के भक्षक बन गए, सोमवार की सुबह सयाना, चिन्गरावाठी और महवा गांवों के जंगल वाले इलाके में कुछ लोगों को जानवर का कंकाल दिखा, गौहत्या के अंदेशे से उन्होंने पुलिस को मामले की जानकारी दी, जानकारी मिलने पर एसएचओ सुबोध सिंह टीम लेकर घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तबतक वहाँ 100 से भी अधिक लोगों की भीड़ इकठ्ठा हो गयी थी और मामले में तत्काल कार्यवाही की मांग कर रही थी मौके की गंभीरता को देखते हुए सुबोध कुमार ने कार्यवाही का आश्वासन दिया और भीड़ को किसी तरह समझा बुझा कर वहाँ से चले आये |


लेकिन मामला यहाँ नहीं थमा दोपहर २ बजे के करीब एक ऐसी ही भीड़ जंगल में मिले हड्डियों के अवशेष लेकर चिन्गरावठी चौकी पहुँच गयी, औरचौकी का घेराव कर तत्काल कार्यवाही की मांग करने लगी, इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने भीड़ को शांत कराने की कोशिश की और आश्वासन देते हुए FIR भी दर्ज कर ली पर फिर भी भीड़ वही बनी रही और चौकी के सामने वाली सड़क को जाम कर दिया, पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन भीड़ वहीँ रही, जिस रोड को भीड़ द्वारा बंद किया गया वह बुलंदशहर को जाती है, कोई सांप्रदायिक उन्माद न हो जाए इसलिए पुलिस लगातार भीड़ को हटाने का प्रयास करती रही, लेकिन भीड़ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी, इसी बीच भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, पुलिस ने हवाई फिरे के जरिये जब भीड़ को तितर बितर करने की कोशिश की तो भीड़ और हिंसक हो गयी और भीड़ में से भी कुछ लोगों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी जान बचाने लिए पुलिस टीम जब चौकी में घुसी तो हिंसक हो चुकी भीड़ ने चौकी में आग लगा दी, इस हिंसा में एक गोली इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को लगी जान बचाने के लिए वह खीतों की और भागे उनके पीछे ड्राईवर रामाश्रय गाडी लेकर खेतों की तरफ गए ताकि उन्हें अस्पताल पहुंचा सकें लेकिन भीड़ ने एक बार फिर इन्स्पेटर सुबोध कुमार पर हमला कर दिया घटना से जुड़े एक वायरल विडियो में सुबोध कुमार को गाडी से बाहर लटकते हुए पड़े देखा जा सकता है, भीड़ ने इस गाडी को आग भी लगा दी, इस घटना में दूसरी जान एक नवयुवक सुमित की भी गयी जिसका सीधे तौर पर इस घटना से कोई लेना देना ही नहीं था वह अपनी एक दोस्त को उस इलाके में छोड़ने के लिए आया था और इन जीवन रक्षकों की नफ़रत की बलि चढ़ गया, सुमित के परिवार ने बताया कि वह पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा करना चाहता था और इस बार अपने सिलेक्शन को लेकर काफी आश्वस्त भी था |

इस पूरे घटना क्रम में 27 लोगों के खिलाफ नामजद और 50-60 अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गयी है, मुख्य आरोपी योगेश राज नाम के एक शख्श को बनाया जा रहा है जो कि स्वयं को बजरंग दल का जिलाध्यक्ष बताता है, इस पर भीड़ के नेत्रित्व और भीड़ को भड़काने का आरोप लगा है यह शख्स अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, यह वही शख्स है जिसने गौहत्या की जानकारी पुलिस को दी और इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट भी दर्ज कराई, 7 लोगों की लिस्ट में 2 नाबालिगों के भी नाम हैं जिनकी उम्र ११-१२ वर्ष है, साथ ही चार अन्य के बारे में दी गयी जानकारी पूरी तरह से गलत पाई गयी है, जबकि एक शख्स सराफत को पुलिस ने गिराफ्तार कर लिया है | उत्तर प्रदेश सरकार ने सुबोध कुमार सिंह के परिजनों को 50 लाख रुपये देने का ऐलान किया है और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भी आश्वासन दिया है, साथ ही मामले में SIT का भी गठन किया गया है |

अब सवाल यह है कि रक्षा के नाम पर कब ये भीड़ सुबोध और सुमित की ह्त्या करती रहेगी और सरकार यूहीं मुआवजे बांटने और SIT बनाने में व्यस्त रहेगी शासन और प्रशासन को भीड़ के पीछे छुपे उन चेहरों को जल्दे से जल्द पहचान कर सख्त से सख्त से सख्त कार्यवाही करनी होगी ताकि सृजन करने वाली इस भीड़ को संहारक बनने से रोका जा सके, समाज का हिस्सा होने के नाते हमें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और खुद को और अपनों को इस हत्यारी भीड़ का हिस्सा बनने या किसी प्रकार से इनका सहयोग करने से रोकना होगा |

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