वन विभाग ने चम्बल में की घड़ियालों गणना

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आगरा(पिनाहट)
– चंबल नदी घड़ियाल मगरमच्छों के साथ अन्य जलचरों के लिए के लिए सुरक्षित मानी जाती है दुनिया भर से  विलुप्त होने के लुप्त होने के कगार पर  घड़ियाल सर्वाधिक चंबल नदी में  पाए जाते हैं पिछले कई वर्षों से चंबल नदी में ही घड़ियालों की नेचुरल हैचिंग की जा रही है जिससे उनका कुंडवा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है चंबल नदी घड़ियाल ही नहीं मगरमच्छ कछुआ डॉल्फिन एवं निम्न प्रकार के जलचरों के लिए प्रख्यात है यह क्षेत्र बढ़ लाइफ सेंचुरी में होने के कारण यहां वन कर्मियों की तैनाती चंबल किनारे बने पंटर पर रहती है ताकि कोई घड़ियाल मगर बच्चों को और उनके अंडा को खतरा ना पहुंचा सके इससे उनकी देखरेख होती रहती है हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वन विभाग कर्मियों द्वारा घड़ियाल मगरमच्छ और डॉल्फिन के साथ अन्य जलचरों की गणना की गई जिसमें मुख्य घड़ियाल मगरमच्छ एवं डॉल्फिन की गढ़ना पर ध्यान दिया गया जिसमें वन कर्मियों ने मोटर बोट द्वारा पिनाहट के रेहा से लेकर जैतपुर क्षेत्र के अंतिम उदयपुर खुर्द तक घड़ियाल मगरमच्छ एवं डॉल्फिन की वार्षिक गणना की जिसमें सर्वाधिक 382 घड़ियाल व 110 मगरमच्छ व 10 डॉल्फिन मिली दुनिया भर से विलुप्त हो रही इन प्रजातियां के चंबल में सुरक्षित संरक्षण  से वन विभाग  अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहा है हर वर्ष घड़ियाल मादा सैकड़ों बच्चों को चंबल के रेत में जन्म दे रही है जिससे यह प्रजाति अपना कुनबा लगातार बढ़ाती नजर आ रही है वन कर्मियों के अनुसार इन प्रजातियों की संख्या अधिक है गणना चंबल के पानी में दिखने के आधार पर की जाती है वार्षिक गणना में जलचरों की प्रजाति लगातार बढ़ती देखी जा रही है यह हमारी बड़ी उपलब्धि है इस दौरान वनकर्मी गिरिजेश, हाकिम सिंह ,सत्य प्रकाश सिंह, बालकिशन, नंदराम, आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट-नीरज परिहार

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