अंतिम समय में चुनाव प्रचार के लिए सारी हदें पार कर रहे प्रत्याशी और समर्थक

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पुरवा : उन्नाव चुनाव के अन्तिम समय दलीय प्रत्याशियों के समर्थकों द्वारा अपने चहेते को विधायक बनाने के लिये इस हद तक गिरकर प्रचार प्रसार करते नजर आ रहे जिसकी कल्पना नही की जा सकती है वही विधान सभा के महा सफर में जातीय खेमे सााफ दिखाई दे रहे है, विधान सभा 167 में 20 वर्षो से लगातार समाजवादी पार्टी का कब्जा चल रहा हैं वही बहुजन समाज पार्टी ने क्षे़त्र के ही एक समाज सेवी पर अपना दाॅव लगाया तो भारतीय जनता पार्टी ने बाहरी प्रत्याशी के रूप में नये चहेरो को लाकर संसदीय चुनाव के जैसा प्रयोग किया है जिससे भारतीय जनता पार्टी के पुंराने नेताओ व उनके समर्थक दिनभर भीतरघात करते नजर आ रहे है | परन्तु दलीय प्रत्याशी अपनी जीत पक्की करने के लिये हर हथकन्डे अपना रहे हैं पर हो कुछ भी इस बार के चुनाव में ब्राम्हण और मुस्लिम मतदाताओं की तो लाटरी ही निकल आई क्योकि यह दोनो समुदाय के मतदाता सबको भा रहे है।

बताते चले की दौरान चुनाव इस चुनाव महासमर में मुझे एक किस्सा याद आ रहा है यह किस्सा है एक मुस्लिम पैगम्बर हजरत सुलेमान अलैस्सलाम के जमाने का उनके जमाने का यह एक मशहूर वाक्या है बताते चलें की हजरत सुलेमान अलैस्सलाम को कुदरत ने वह सलाहियत बख्सी थी कि वह दुनिया के परिन्द्र व चरिन्द्र तमाम जीव जन्तुओं की जबान समझने का सबब हासिल था। कहते है कि एक एक चिड़िया का जोड़ा जिसे हम पेढ़की कहते हैं एक पेड़ की डाल पर पेढ़की व उसके साथ पेढ़का दोनो ही बैठे थे। तभी सामने से एक शख्स टोपी लगाये एक मौलवी की सबाहत मे सामने से चला आ रहा था तभी पेढ़की ने अपने पेढ़के से कहा चलो नीचे की डाल से ऊपर वाली डाल पर उड़ चले कही यह शख्स हमे पकड़ न ले। मगर पेढ़के ने अपनी पेढ़की की बात नही मानी और वही उसी डाल पर बैठा रहा इतने मे पेढ़की ऊपर उड़ गयी और पेढ़का वही बैठा रहा तभी वह शख्स जो मौलवी की सबहत बनाये था आ गया और उसने इधर उधर देखा और फट से पेढ़के को पकड़ लिया यह माजरा देख पेढ़की चिल्लाई कि तुमने हमारा कहना नही माना और आप पकड़ गये तभी पेढ़की रोते चिल्लाते हजरत सुलेमान अलैस्सलाम की बारगाह में हाजिर हुई चूंकि उन्हें तमाम चरिन्द परिन्द की जबान समझने की सलाहियत थी। पेढ़की रोते हुए उनकी गोद मंे गिर गयी तो उन्होने पूछा की क्या माजरा है तो पेढ़की ने रोते हुए पूरा वाक्या सुनाया तो उन्होने कहा पेढ़के को तुम्हारी बात माननी चाहिये और उसे भी उड़ जाना चाहिये था। तो पेढ़की ने कहा हजरत हमारा पेढ़का बहुत ही भोला है वह तो मोलवी की सबहत देखकर फंस गया वह शख्स शकल से शिकारी नही लग रहा था आखिर पेढ़की की पूरी बात सुनकर हजरत ने शिकारी को तलब कराया और पेढ़़के को आजाद कराया और उसे हिदायत दी कि अब शिकार करने जाना तो शिकारी की सबहत मे जाना। परन्तु आज हम देख रहे है दौरान चुनाव कुछ ऐसे लोग जो कभी जुम्मे की नमाज तक नही पढ़ते वह लोग टोपी पहनकर भोले-भाले मुसलमानों को टोपी पहनाने की कोशिश कर रहे।

वही जो तस्वीर चुनावी देखने को मिल रही है कि समाजवादी पार्टी से लगातार चार बार विधायक रहे उदयराज यादव जो अपने सजातीय मतदाताओ के साथ मुस्लिम व ब्राम्हण मतदाताओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति के वोटरो को अपने पक्ष मे लाने के लिये रात दिन मेहनत कर रहे है पर इस बार मुजफ्फरनगर दंगा सचर कमेटी की रिपोर्ट मुस्लिमों को सरकारी नौकरियों मे आरक्षण जैसे ज्वलनशील मुद्दे अधिक आड़े आ रहे है और विधानसभा क्षेत्र मे विरोध का सामना अधिक झेलना पड़ रहा है जिससे आज उन्हें नोक्कड़ सभायें करनी पड़ रही है वही भाजपा प्रत्याशी उत्तम चन्द्र राकेश लोधी ने अपने सजातीय मतदाताओं को जोड़ने मे पूरी ताकत झोंक दी पर अन्य समाज के जैसे ब्राम्हण समुदाय के जो भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय नेता व पदाधिकारी उनसे कोषों दूर नजर आ रहे है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी बगल की विधान सभा क्षेत्र भगवन्तनगर मे पूर्वमंत्री भाजपा प्रवक्त हृदय नरायण दीक्षित के चुनाव प्रचार मे वही रातो दिन डेरा जमाये है साथ ही भाजपा के एक पूर्व प्रत्याशी जिन्हें टिकट न देकर भाजपा ने उत्तम चन्द्र राकेश लोधी को प्रत्यासी बनाया है जिनका विरोध भी भाजपा प्रत्याशी को झेलना पड़ रहा है। साथ ही बाहरी होने का भी सुररा जोरो पर चल रहा है वही इस बार बहुजन समाजपार्टी ने लगभग 8 माह पहले ही हिलौली विकास खण्ड के कोदईहा निवासी अनिल सिंह जो माही संस्था के अध्यक्ष भी है जिन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था समय से पहले बसपा प्रत्याशी के रूप में घोषणा होने का पूरा लाभ अनिल सिंह को मिल रहा है मजेदार बात तो यह है कि सन् 2012 के चुनाव में क्षेत्र के क्षत्रिय मतदाता पूर्ण रूप से उदयराज के साथ लामबन्द था। 2012 में कोई ब्राम्हण प्रत्याशी न होने के कारण पूर्ण रूप से ब्राम्हण मतदाता सपा मे तथा फिफ्टी प्रतिशत मुस्लिम और अधिक संख्या में दलितो मे रावत समाज का मतदाता था परन्तु इस बार ब्राम्हण भी खिसकता नजर आ रहा है वही आर0एस0एस0 के बयान के चलते दलित समाज का मतदाता इस बार बसपा के खेमे मे लामबन्द नजर आ रहा है रही बात मुस्लिम मतदाताओं की वह भी उलमा काउंसिल चाहे व सिया आलिम हो या सुन्नी या देवबन्दी तथा दिल्ली के जामा मस्जिद के इमाम अहमद बोखारी व बरेली शरीफ के आलिमो ने बसपा केे समर्थन में मतदान करनें को कहा मुस्लिम भी बसपा के पाले मे अधिक नजर आ रहा है। अनुसूचित जाति के मतदाताओं मे आरक्षण की समीक्षा की दहशत किसानो को भाजपा के प्रति साफ आक्रोष देखा जा रहा है चाहे वह जिस समुदाय का हो क्यों किसान आवारा गाय व बैलो से रात दिन अपनी फसल की रखवाली से परेशान है।

अब देखना यह है कि क्या करता है 167 विधानसभा क्षेत्र पुरवा का मतदाता क्या बदलेगा पुरवा विधानसभा का इतिहास। अगर देखा जाये तो कोई भी प्रत्याशी प्रचार मे कोई कमी नही छोड़ना चाहता सभी प्रत्याशी पूरी दमखम के साथ नजर आ रहे है वही युवा जोश और समर्थन को देख मतदाता भी अपना विचार बदलने पर मजबूर दिखाई दे रहे है वही गुड़ा भाग लगाने वाले भी यह कयास लगा रहे है कि क्या इस बार बदल जायेगा जनता का फैसला या फिर दोहराई जायेगी वही कहानी या क्षेत्र में हनक बनायेगा कोई बाहरी यह सभी बाते एक रहस्यमय बनी है जिसका फैसला प्रजाजंत्र के हाथ में है और दो दिन बाद 19 फरवरी को ए0वी0एम0 मशीन के माध्यम से 11 मार्च को इस रहस्य का उद्घाटन होगा वही तमाम गांवो का सर्वे करने से जो तस्वीर सामने आ रही है उससे बदलाव होने के आसार ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

रिपोर्ट – मोहम्मद अहमद

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