हवाई दावों पर टिकी है प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति

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रायबरेली। जनपद की छः विधान सभा सीटों सदर, बछरावां, हरचंदपुर, सलोन, सरेनी व ऊचाहांर में चुनाव प्रचार का आज अंतिम दिन है। लेकिन आम मतदाता अभी भी शांत है। वह अपनी भावनाएं स्पष्ट नहीं कर रहा। जबकि विभिन्न राजनैतिक दलों से जुड़े तथाकथित ठेकेदार व दलाल सक्रिय हैं। लेकिन उनकी भी पकड़ मतदाताओं में न के बराबर ही दिख रही है। बावजूद इसके वह पार्टी व प्रत्याशियों पर दबाव बनाकर अपनो को येन-केन-प्रकारेण लाभ पहुॅचाने में लगे हुये हैं। इसमें काफी हद तक वह सफल भी दिखाई दे रहे हैं।

जनपद रायबरेली कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र है। आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है और इस क्षेत्र ने देश को दो प्रधानमंत्री भी दिये। लेकिन इधर कुछ वर्षों से पार्टी के जनाधार मे तेजी से गिरावट आई है। इसका प्रमुख कारण है कि पार्टी में नेता व कार्यकर्ता के नाम पर वही लोग सक्रिय दिखाई दे रहे हैं जिन्हें या तो पार्टी से माहवारी खर्चे मिलते हैं या फिर वह बड़े ठेकेदार अथवा प्रापर्टी डीलिंग के साथ-साथ ट्रांसफर व पोस्टिंग के नाम पर सुविधा शुल्क लेकर ऐसे लोगों का काम कराते रहते हैं जिनका आम मतदाता के हित व विकास से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं रहता है। यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी से समर्थित अधिकांश प्रत्याशी इस विधान सभा चुनाव में संघर्ष तो कर रहे हैं लेकिन विजय श्री मिलना फिलहाल टेढ़ी खीर ही दिख रहा है। इसके बावजूद पार्टी के नेता बड़ी-बड़ी डींगे हांक रहे हैं। वह बैठकों व सभाओं के नाम पर जनता के विकास का लाखो रूपया खर्च कर रहे हैं और विकास के हवाई दावे कर रहे हैं, लेकिन असलियत में आज भी जनपद की खस्ताहाल सड़के, नहरों में पानी का अभाव और अस्पतालों में दवा के नाम पर गरीबों का शोषण देखा जा सकता है। रही बात शिक्षा की तो कांग्रेस से टिकट पाकर चुनाव लड़ रहे ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो पिछले कई सालों से विधायक तो हैं लेकिन जनहित की किसी भी समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों की हालत भी इससे अलग नहीं है। पार्टी के तथाकथित वरिष्ठ नेताओं व प्रत्याशी चयनकर्ताओं ने ऐसे प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार दिये हैं जिनको आम मतदाता स्वीकार नहीं कर पा रहा है। सरेनी, बछरावां व सदर में भाजपा के जो प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं वह अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ने का दम तो भर रहे हैं लेकिन असलियत यह है कि उनके अपने ही उनकी टांग खीचनें में लगे हुये हैं। यही नहीं प्रत्याशी भी पैसे के अभाव का रोना रो रहे हैं। जिससे वह अंतिम समय में भी मतदाताओं को रिझा पाने में फिलहाल सफल होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। विधान सभा सीट हरचंदपुर व सलोन में फिलहाल भाजपा प्रत्याशियों की स्थिति कुछ मजबूत दिख रही है। लेकिन अंतिम समय में ऐसे लोग प्रचार में लग गये है जिससे उनकी छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
समाजवादी पार्टी ने ऊचाहांर व सरेनी विधान सभा में कांग्रेस से गठबंधन होने के बावजूद प्रत्याशी उतारे हैं। जो वर्तमान में विधायक भी हैं। वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खास भी माने जाते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री दोनो विधान सभा क्षेत्रों में स्वयं आकर प्रचार कर चुके है और विकास के नाम पर जनता से वोट मांग कर गये हैं। लेकिन परिणाम तय करेंगे कि सपा ने यहां विकास कराये थे या नहीं। फिलहाल सपा के दोनो प्रत्याशी चुनाव में पूरी ताकत के साथ लगे हुये हैं।
जबकि बसपा की स्थिति विधान सभा सीट सदर, बछरावां व हरचंदपुर में संघर्ष करती दिखाई दे रही है। लेकिन प्रत्याशियों का संघर्ष मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में कितना सफल होगा यह चुनाव परिणाम ही तय करेंगे। रही बात अन्य दलों व निर्दलीय प्रत्याशियों की तो यह स्पष्ट हो चुका है कि कोई भी प्रत्याशी फिलहाल विधान सभा चुनाव के इस मैदान में अपने दम खम पर जीतने की स्थिति मे नहीं है। चुनाव में एक खास बात और देखने को मिल रही है कि प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदाताओं को करने के लिये अपने पार्टी के नेताओं व साथियों पर विश्वास करने के बजाय अपने परिवार के लोगो व कुछ करीबी रिश्तेदारों पर ही भरोसा दिखा रहे हैं और इसका भी असर चुनाव में दिख रहा है। क्योंकि आम मतदाता शांत तो है लेकिन चुटकी लेने से बाज नहीं आ पा रहा है। मतदाताओं का कहना है कि जिले की अधिकांश विधान सभा सीटों पर परिवारवाद व रिश्तेदारवाद हाबी है। फिलहाल चुनाव के अगले चैबीस घंटे प्रत्याशियों व मतदाताओं के लिये बहुत ही अहम है। क्योंकि इसी पर उनका भविष्य टिका हुआ है।
रिपोर्ट – राजेश यादव

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