छः महीने बीत जाने के बाद भी नहीं सुधरी कैश की क़िल्लत

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कबरई/महोबा (ब्यूरो) : आठ नवम्बर को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने देश के नाम सम्बोधन करके नोट बंदी की जानकारी दी थी और नोट बंदी से होने वाली परेशानी के लिए केवल पचास दिन का समय माँगा था लेकिन आज छः महीने बीत जाने के बाद भी कैश की क़िल्लत ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही है |

सुरहा गाँव निवासी खेमचंद व महेंद्रपाल ने बताया कुछ दिन पहले हमारे घर ने शादी थी खेती में हुये अनाज को क्रय केंद्रों में बेचा बहा से रुपए तो बैंक अकाउंट में भेज दिया लेकिन बैंक वाले कैश की क़िल्लत बताते हुए दो हज़ार रुपए दे कर ही भगा देते है किसी प्रकार क़र्ज़ लेकर शादी की आज भी क़र्ज़ की रक़म व उसका ब्याज चुका रहे है |

वहीं इलाहाबाद बैंक मैनेजर सुरहा दिपांकर से कैश के सम्बंध में बात की उन्होंने इसकी क़िल्लत के लिए सीधे आर बी आइ व केंद्र की सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया, कैश की क़िल्लत गाँवों के अलावा शहरों में भी बनी हुई है लोगो को शादी में क़र्ज़ लेकर शादी करनी पड़ रही है।

रिपोर्ट – प्रदीप मिश्रा

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