सेंसर बोर्ड सिर्फ अपना काम करे, मल्टीप्लेक्स के दर्शक काफी समझदार होते हैं : कोर्ट

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निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ पर सेंसर बोर्ड की आपत्ति के चलते मामला हाईकोर्ट पहुँच गया है, मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रमाणन बोर्ड को जमकर फटकार लगाईं, कोर्ट ने सेंसर बोर्ड की भूमिका पर टिपण्णी करते हुए कहा कि बोर्ड का अधिकार सिर्फ फिल्मो को प्रमाणित करने तक ही सीमित है, फिल्मों को सेंसर करने का कोई अधिकार बोर्ड को नहीं है |

कोर्ट ने कहा कि प्रमाणन बोर्ड यह फैसला दशकों पर छोड़ दे कि वे क्या देखना चाहते हैं और क्या नहीं | फिलहाल कोर्ट ने मसले मसले पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है पर 13 जून को ओने वाली सुनवाई में अंतिम फैसला भी आ जायेगा | न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति शालिनी फणसालकर की खंडपीठ में इस मामले पर सुनवाई पूरी हो गयी है मामले का फैसला 13 जून तक के लिए सुरक्षित रख लिया गया है |

सेंसर द्वारा फिल्म के कुछ द्रश्यों को अश्लील बताने पर कोर्ट ने कहा आप क्यों परेशां होते हैं, मल्टीप्लेक्स के दर्शक वैसे भी काफी समझदार होते है, फिल्म में ऐसे कंटेंट होने के पीछे यदि कोई कहानी है तभी फिल्म चलेगी अन्यथा sirf ऐसे कंटेंट के आधार पर फिल्म नहीं चलती | सबकी अपनी पसंद होती है टीवी हो य सिनेमा लोगों को उनकी पसंद के अनुसार चुनाव करने दीजिये | आपका कार्य सिर्फ प्रमाणपत्र देना है |

फिल्म गोवा गॉन का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि उस फिल्म में भी गोवा को ऐसी जगह के रूप में दर्शाया गया है, जहाँ ड्रग्स और नशे की भरमार है, फिल्म ऐसी होनी चाहिए कि लोग उसे दो घंटे तक देख सकें | 1952 से अबतक क्या बोर्ड सभी को संतुष्ट कर पाया है ?

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