कौशल दिव्यांग जाग्रति सेवा संस्थान की तरफ से विकलांगो को बाटे गए प्रमाणपत्र


कालाकांकर/प्रतापगढ़ (ब्यूरों) आज के युग में दिव्यांग किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है ।अगर उन्हें सही दिशा मिल जाये तो वो भी एक आम इंसान की तरह ही प्रयास कर सफलता की ओर बढ़ सकते है| दिव्यांग व्यक्ति शरीर से दिव्यांग हो सकता है ,लेकिन दिमाग से नहीं । मार्गदर्शन करने वाला होना चाहिए और दिव्यांगों को मौका देने वाला हो तो एक मिशाल कायम हो सकती हैं| ये बातें कौशल दिव्यांग जागृति सेवा संस्थान के प्रबंधक कौशल मौर्या ने दिव्यांगों को प्रमाण पत्र देते समय कही| तीन माह में निशुल्क कंप्यूटर शिक्षा देने वाली इस संस्था ने अब तक विकलांगो के लिए बहुत सारे कार्य किये है और विकलांगो को उस काबिल बनाया है की वो अपने लिए भविष्य में कुछ कर सके| इस संस्था ने दिव्यांग महिलाओं और पुरुषों के लिए सिलाई कढ़ाई से लेकर कंप्यूटर तक निःशुल्क करवा कर अब तक लगभग २००० दिवव्यांगोंको प्रशिक्षण दे चुका है|

आज संस्था के मुख्य अतिथि प्रदीप कुमार ने साठ विकलांग बच्चों को कम्यूटर शिक्षा का प्रमाण पत्र प्रशिक्षित होने के बाद दिया| इस मौके पर संस्था के प्रबंधक कौशल मौर्या, सचिव घनस्याम मौर्या , प्रिंसिपल सीमा देवी समेत संस्था के सभी पदाधिकारीगण मौजूद रहे|

रिपोर्ट – पंकज मौर्या

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