चीन की बाजारों में जारी के चलते 43 फीसदी कंपनियों ने रोक दिया कारोबार, भारत को हो सकता हैं बड़ा फायदा

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Stock- Markets-China (photo credit -.topnews.in)
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चीन के शेयर बाजार के क्रैश हो जाने के बाद और लगभग 300 अरब डालर का नुकशान हो जाने के बाद चीन की लगभग 43 फीसदी कंपनियों ने अपने ब्यापार को रोक दिया हैं या फिर यूँ कहे तो चीन से अपने हाथ खींच लिए हैं I आपको बता दें कि अगर चीन के बाजारों पर गिरावट का असर जारी रहा तो चीन के ऊपर आर्थिक मंदी के बादल मंडरा सकते हैं I और चीन की आर्थिक ब्यवस्था के चरमराते ही अमेरिका और यूरोप पर इसका असर देखने को मिलेगा I

चीन के आर्थिक ब्यवस्था में चल रहे सुधार के सभी कार्यक्रमों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता हैं, ध्यान देने योग्य बात यह हैं कि चीन वैश्विक दबाव के चलते अपने देश की सरकारी कंपनियों में सरकार के शेयर को कम करने की कोशिसो पर लगतार बल दे रहा हैं लेकिन पिछले दिनों से हम जिस तरह चीनी बाजार में गिरावट का सिलसिला देख रहे हैं और जिस तरह से इस मुश्किल घडी में चीनी सरकार बाजार की मदद करने के लिए सामने आयी हैं उससे एक बात यह साफ़ हो जाती हैं कि चीन में सरकार के द्वारा चलाये जा रहे विस्तृत आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को तगड़ा झटका लग सकता हैंI

चीन की बाजारों की बदहाली को देखते हुए दुनिया भर के अर्थ जगत के विशेषज्ञ चिंतित हैं, विशेष कर के चीन, यूरोप और अमेरिका के क्यों कि चीन की अर्थ ब्यवस्था कई देशों के साथ प्रत्यक्ष व परोक्ष तौर पर जुडी हुई हैं, यूरोप और अमेरिका की कई बैंकों का काफी बड़ा निवेश चीन में हैं और अगर चीन की अर्थब्यवस्था बदहाली की तरफ बढ़ती हैं इन देशों की भी अर्थब्यवस्था पर झटका लग सकता हैं I

चीनी बाजार में जारी लगातार गिरावट के चलते चीनी कंपनियों को भी तगड़ा झटका लगा हैं जैसा की हम ऊपर ही बता चुके हैं कि चीन की लगभग 43 फीसदी कंपनियों ने बाजार में काम करना रोक दिया हैं I बुधवार को हुई भीषण गिरावट से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि दिनभर में लगातार जारी गिरावट के चलते चीन की जीडीपी का लगभग आधे के बराबर का मार्केट कैप समाप्त हो गया और केवल इतना ही नहीं इसका असर अब आने वाली चीनी कंपनियों के आईपीओ पर भी पड़ेगा I

हालाँकि चीन की मार्केट के क्रैश होने से भारत को कोई विशेष फर्क पड़ने वाला नहीं हैं बल्कि विशेषज्ञों का तो ऐसा भी मानना हैं कि चीनी मार्केट के क्रैश होने से सीधा फायदा भारतीय बाजार को होने वाला हैं Iक्योंकि अब इन्वेस्टरों का रुझान भारत की तरफ अधिक हो सकता हैं और विदेशी निवेशक अब भारत की मार्केट में अधिक दिलचस्पी ले सकते हैं I

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