चमोली में बल्लियों के सहारे नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण

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गोपेश्वर तीन साल बाद भी अटूड़ी पटूड़ी झूला पुल का निर्माण पूर्ण नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीण लकड़ी के कच्चे पुल से नदी पार करने को मजबूर हैं। इस दौरान ग्रामीणों के साथ अनहोनी की आशंका बनी है। बावजूद इसके सरकार इस ओर ध्यान हीं दे रही है।

वर्ष 2013 में आपदा से अलकनंदा नदी पर बना पुल बह गया था। सरकार ने 2014 में 10.20 करोड़ की लागत से 140 स्पॉन के पुल की स्वीकृति दी थी। पुल निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई। पुल निर्माण 2016 में पूरा होना था। लेकिन पुल निर्माण की बेहद धीमी रही। इसके चलते पुल तय समय में नहीं हो पाया।

वहीं पुल नहीं बनने से ग्रामीण लकड़ी की बल्लियों के सहारे नदी को पार कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों के नदी में गिरने की संभावना बनी रहती है। गर्मियां आते ही यह सहारा भी छिन जाता है। कारण गर्मी में बर्फ गलने से अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ता है। वहीं गर्मी के बाद बरसात में जलस्तर और बढ़ोत्तरी हो जाती है। ऐसे में बल्लियों से गुजरना मुश्किल हो जाता है।

वहीं मामले में लोनिवि के अधिशासी अभियंता मनोज भट्ट का कहना है कि पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। कार्य में देरी पर ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। पुल निर्माण के लिए उपयोग में लाई गई भूमि का मुआवजा भी बना दिया गया है। पुल निर्माण में तेजी लाई जा रही है।
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