चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह संपन्न

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रायबरेली (ब्यूरो)- राष्ट्रीय फैशन प्रौद्याोगिकी संस्थान में चम्पारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के आयोजन के दूसरे दिन चम्पारण सत्याग्रह तथा नील आंदोलन से जुडे़ कई पहलुओं पर विषेषज्ञों द्वारा वार्ता तथा कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें निफ्ट के संकाय सदस्यों तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

वार्ता के प्रमुख प्रवक्ता डाॅ0 के0 के0 गोस्वामी, निदेषक, इण्डियन इंस्टीट्यूट आॅफ कार्पेट टेक्नोलाॅजी, भदोही ने अपना 40 साल का अनुभव सबके साथ साझा किया और नील आन्दोलन तथा प्राकृतिक रूप से नील फूल से प्राप्त रंग जिसे इंडिगो कहते हैं, रंग से रंगने की प्रक्रिया पर खासतौर पर सबका ध्यान आकर्षित किया। हमारा देष भारत, इस नील फूल का सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक देष है इसलिए इसका नाम इंडिगो, जो इंडिया से निकला है, रखा गया। इसका इतिहास 6000 साल पुराना है और कई देष जैसे पेरू, इजिप्ट, मैसोपोटैमिया, सिंधु सभ्यता आदि में इसका उपयोग देखने को मिलता है।

नील के साथ-साथ उन्होंने कई और प्राकृतिक रंगांे से भी सबको अवगत कराया और प्राचीन पद्धतियों के महत्व को दर्षाया। ये प्राकृतिक रंग न केवल कपडों को रंगने में काम आते हैं बल्कि इन रंगों का औषधिक महत्व भी है। इन प्राकृतिक रंगों से रंगे कपड़े पहनने पर त्वचा पर औषिधिक प्रभाव के अमूल्य गुणों का भी महत्व सबके सामने रखा।

निदेशक निफ्ट रायबरेली डाॅ0 भरत साह ने निफ्ट के छात्र-छात्राओं तथा अध्यापकगणों का उत्साह पूर्वक इस दो दिन के समारोह में भाग लेने के लिए अत्यंत सराहना की, साथ ही उन्होनें उभरते हुए डिजाइनर्स को प्राकृतिक रंग एवं तकनीक के अधिकाधिक उपयोग करने लिए प्रोत्साहित किया। चम्पारण शताब्दी समारोह के सफल आयोजन पर संयुक्त निदेषक श्री अखिल सहाय ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

रिपोर्ट- राजेश यादव 

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