चौराहों पर बेगानों को अपना बनाती ये ‘ट्रैफिक पुलिस’

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वाराणसी (ब्यूरो)- जब भी हम कहीं जाते हैं, तो हमारे दिमाग में यही रहता है कि हम अपने गंतव्य तक जल्दी से जल्दी पहुंचें। कई बार रोड खाली होती है, तो कई बार सड़कों पर जाम लग जाता है। ऐसे में सड़क के बीचो-बीच, हाथ में डंडा लिए हुए, सीटी के साथ, पसीने से लथपथ, सफेद शर्ट और खाकी पैंट पहने एक शख्स रोड को खाली करवाने की क़वायद करता है। आम बोलचाल की भाषा में इन्हें ‘ट्रैफिक पुलिस’ कहते हैं। इनकी सच्ची निष्ठा और लगन से हमें कई परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है।

आकाश में सूरज 44 डिग्री सेल्सियस के तापमान साथ अपने आवेग में रहता है, धरती भी हमें तपाने की साजिश करती है। ऐसे में ज़िंदगी की रफ़्तार हमें अहसास कराती है कि रुकना मना है, थकना मना है। अपनी मंज़िल को पाने के लिए हम आगे बढ़ते हैं। कभी गाड़ियों से तो कभी पैदल, मगर हम आगे बढ़ते हैं। तमाम उपाय कर के हम गर्मी के प्रकोप से ख़ुद को बचा लेते हैं।

कैंट रेलवे स्टेशन पर कड़े धूप में खड़े TSI हरेन्द्र कुमार, CO रामसेवक, TSI अबिचल पांडे व टीम के लिए यही गर्मी ज़िंदगी है और उनके सपने भी। वे हमारे लिए दिन-भर धूप में खड़े रहते हैं, काम करते हैं, ताकि हमें परेशानी न हो। जिनकी वजह से हमारा हिन्दुस्तान चल रहा है।

पसीने से लथपथ, सड़क पर, रेलवे ट्रैक पर, गलियों में और चौक पर, आपको ऐसे लोग ज़रूर मिल जाएंगे, जिन्हें न तो आप पहचानते हैं और न ही वो पहचानते हैं। बस फ़र्क इतना होता है कि आप उन्हें ताकते हैं, लेकिन वो आपको नहीं ताकते होंगे।

वो अपने काम में इतने रमे होते हैं कि उनको पसीने भी सुबह की ओस की बूंद की तरह लगते हैं। न खाने की फिकर और न ही पानी पीने की। बस ज़िंदगी के कड़वे सच को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उनका भी परिवार होता है और उनकी भी ज़िंदगी होती है। हमारी तरह वो भी सांस लेते हैं, मगर हमारी सांसों का ज़्यादा ख़्याल रखते हैं।

रिपोर्ट-बृजेन्द्र बी यादव

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