छुईखदान ब्लाक का ऐसा गांव, जहां आंगनबाड़ी तक नहीं

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पैलीमेटा (ब्यूरो) छुईखदान में ऐसा भी गांव है जहां यह नहीं जानते कि आंगनबाडी क्या होता है ? कारण यह है कि ग्रामीणों की मांग के बाद भी ग्राम लमरा में आंगनबाडी नहीं खुल सका है। आंगनबाडी नहीं होने से कुपोषित बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और रेडी-टू-ईट योजना से वंचित होना पड़ रहा है ।

जानकारी के अनुसार पैलीमेटा से लगभग 2 कि.मी. दूरी पर मेन रोड पर स्थित आदिवासी बाहुल्य ग्राम लमरा में काफी समय से आंगनबाडी केन्द्र खोलने की मांग कि जा रही है । ग्राम के केदार रजक, मुक्तानंद मेंरावी इस सम्बंध में जिला प्रशासन और महिला बाल विकास विभाग को कई बार अवेदन देकर थक चुके हैं । गांव के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर इस संबंध में आवेदन दिया था, किन्तु आंगनबाडी केंन्द्र अब तक नहीं खुला है ।

रेडी-टू-ईट का लाभ नहीं
ग्रामीणों ने आगे बताया कि छोटे बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिये महिला विकास विभाग के द्वारा रेडी-टू-ईट योजना चलाकर पोषण अहार का वितरण किया जा रहा है, किन्तु ग्राम लमरा में आंगनबाडी केन्द्र नहीं होने से गांव के बच्चे इस योजना से वंचित हो रहे हैं । ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाडी नही होने से छोटे बच्चे अपने माता पिता के साथ खेत खलियान जाकर समय गुजारते हैं ।

स्कूल जाने के लिये सात साल का इंतजार
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम लमरा में प्राथमिक शाला से लेकर मिडिल तक स्कूल जरुर हैं, किन्तु छोटे बच्चों को स्कूल जाने के लिऐ सात साल का इंतजार करना पडता है ।

पर्याप्त संख्या में छोटे बच्चे
ग्रामीणों के माने तो आंगनबाडी खोलने के लिये सर्वे किया गया । जिसमें इस गांव में 61 से 100 बच्चे होना पाया गया । ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाडी खोलने के लिये जिला प्रशासन कलेक्टर, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौपा जा चुका है किन्तु अब तक आंगनबाडी नहीं खुला है ।

रिपोर्ट – हितेश मानिकपुरी पैलीमेटा/हरदीप छाबड़ा

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