बालश्रम दण्डनीय अपराध है: सचिव सपना शुक्ला

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सुलतानपुर(ब्यूरो)- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती सपना शुक्ला ने कहा कि बाल श्रम दण्डनीय अपराध है। 06 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा का अधिकार है। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य लेना दण्डनीय अपराध है, जिसमें 06 माह की सजा के साथ जुर्माने का भी प्राविधान है।

सचिव श्रीमती सपना शुक्ला आज अर्न्तराष्ट्रीय बालश्रम विरोध दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में नगर स्थित के.एन.आई.सी लालडिग्गी में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रही थी। सचिव श्रीमती शुक्ला ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को बालश्रम के बारे में जानकारी मिले तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत करा सकता है। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आपसी समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण किया जाता है। यदि निर्बल वर्ग के व्यक्ति जो अपने मुकदमों की पैरवी हेतु अधिवक्ता नहीं कर सकता, उसे प्राधिकरण द्वारा अधिवक्ता की निःशुल्क सेवायें उपलब्ध कराने का प्राविधान है।

इस अवसर पर सहायक श्रमायुक्त आभा श्रीवास्तव ने कहा कि बालश्रम एक सामाजिक अपराध है तथा देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि अशिक्षा गरीबी व जागरूकता बाल श्रम के मुख्य कारण हैं। उन्होंने बाल श्रम उन्मूलन के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी विनोद राय ने बताया कि जनपद में बाल कल्याण समिति संचालित है। जिसके द्वारा पीड़ित को न्याय दिलाने का कार्य किया जाता है।

कार्यक्रम के अन्त में विद्यालय के प्राचार्य डॉ.आर.बी.श्रीवास्तव ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुये बाल श्रम उन्मूलन के सम्बन्ध में अपने सुझाव दिये। इस अवसर पर जिला सूचना अधिकारी आर.बी.सिंह, श्रम प्रर्वतन अधिकारी रामवृक्ष, नायब तहसीलदार व विधिक सेवा प्राधिकरण के हरीराम तथा विद्यालय के छात्र, शिक्षक व शिक्षिकायें उपस्थित थी।

रिपोर्ट- संतोष यादव 

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