बाल मजदूरी कानूनी अपराध एवं सामाजिक कलंक

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प्रतीकात्मक

हाजीपुर ब्यूरो : वैशाली जिले में बाल मजदूरों की संख्या अधिक है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। बाल मजदूरी का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। होटलो व दुकानों, इंटभट्टों व सड़क निर्माण हर जगह 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे बाल मजदूरी करने पर मजबूर है। इसका कारण जो भी हो, बालश्रम उन्मूलन किये बिना स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है । बाल श्रम उन्मूलन के लिए बालश्रम विभाग के पदाधिकारियों को प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए । जब की बाल श्रम रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बालश्रम अधिनियम 1986 बनाया है |

जिसके धारा 3 और 14 के अनुशार मजदूर रखने वाले नियोजकों को एक साल की सजा तथा 20 हजार रुपए का जुर्माना है साथ ही मजदूरी अधिनियम के तहत नियोजकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान दस गुना मुआवजा के साथ करना है। बालश्रम एवं सर्वोच्य न्यायालय का निर्णय है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी प्रकार जोखिम भरे काम में लगाया जाना मना है।

संविधान की धारा 39 ई. के अनुसार राज्य ऐसी व्यवस्था करे कि बच्चों की नाजुक उम्र का दुरुपयोग न हो । धारा 39 (एफ) में प्रावधान है कि राज्य ऐसी सुविधा एवं अवशरों की वयवस्था करेगा। जिससे बच्चे स्वतंत्र एवं सम्मान के साथ स्वस्थ तरीके से विकसित हो तथा उनका बचपन-शोषण सुरक्षित हो। बाल मजदूरी तभी रुकेगा जब प्रशाशन चुस्त हो जनप्रतिनिधि दुरुस्त हो और समाज का हर व्यक्ति जागरूक हो।

रिपोर्ट – नसीम रब्बानी

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