रो-रो कर डोभा (गड्ढ़े) का पानी पीने को मजबूर प्राथमिक विद्यालय के बच्चे

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दुमका ब्यूरो : दुमका जिला की जरमुंडी प्रखंड अंतर्गत बरमसिया पंचायत के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय डुमरिया बारा हिरना (दक्षिण) में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं डोभा का जहरीला पानी पीने के लिए विवश हैं, यहां पढ़ने वाले छात्र पिछले 4 वर्षों से इसी डोभा के पानी पर निर्भर हैं |


चैत्र वैशाख जेठ की चिलचिलाती गर्मी में डोभा का पानी इन बच्चों की तरावट को दूर करता है स्थिति इतनी भयावह है कि जिस पानी को पशु को पीनी चाहिए थी उस पानी को मानव सेवन कर रहे हैं | हर रोज जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो अपने स्कूल में किए गए बोरिंग को देखने के लिए पहुंचते हैं और शिक्षक से पूछते हैं कि चापाकल आज भी नहीं लगा है सर क्या हमें उसी डोभा का पानी आज भी पीना होगा सर ? तो इस पर शिक्षक महोदय बोलते हैं बच्चे लोग हमने तो उपर खबर कर दी है, लेकिन सिस्टम ही नीचे से ऊपर तक अराजकता के दलदल में फंसा हुआ है इसमें हम और तुम क्या कर सकते हैं ?  शिक्षक के इन बातों को सुनने के बाद बच्चे अपने अध्ययन में लीन हो जाते हैं |

गौरतलब है कि पहाड़ पर अवस्थित इस स्कूल का भूगोल यह है कि इसके चारों तरफ बड़े-बड़े चट्टान और सामने रेलवे लाइन देवघर दुमका मार्ग गुजरा हुआ है पहाड़ पर होने के चलते इस स्कूल में गर्मी भी बहुत ज्यादा अधिक पड़ती है जिसके चलते बच्चों को पानी की आवश्यकता 1 लीटर के बजाय 5 लीटर की हो जाती है इसलिए बच्चों को पढ़ाई का कम समय मिल पाता है क्योंकि वह हर आधा घंटा में पानी भरने के लिए डोभा में चला जाता है ऐसी स्थिति में झारखंड सरकार की यह इच्छा कैसे पूरी होगी कि बार-बार वह अपने भाषण में कहते हैं के झारखंड में हर घर को स्वच्छ जल मुहैया कराएंगे क्या यह स्कूल की दशा देखने के बाद क्या आपको लगता है की कथनी कभी करनी में बदलेगी ? डोभा के पानी के बाबत स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे छोटू मरांडी , संजय किसकू, सोना मुनि हेम्व्रम, प्रियाकुमारी, रास मुनि सोरेन , ललिता मुर्मू , झुलसा मुर्मू ,सुनीता मरांडी ,और मुन्ना हसदा का कहना था कि कब तक हम लोग गड्ढे का पानी पीकर स्कूल में पढ़ाई का कार्य करते रहेंगे

रिपोर्ट : धनंजय कुमार सिंह 

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