जब नरेंद्र मात्र छह वर्ष के थे …!!

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स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद

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माँ ने शरू से आखिरी तक सुनकर आशीर्वाद देते हुए कहा, “बच्चा, यही तो मनुष्य की तरह का कार्य हैं ! सर्वदा इसी प्रकार मनुष्य होने की चेष्टा करना I

(विवेकानंद चरित)

उस समय उस छोटे से बालक को आशीर्वाद देने वालों क्या पता था कि एक दिन यही बालक पूरी दुनिया को अपने ज्ञान और प्रकाश से आशीर्वाद देकर अनुग्रहित करेगा ! बड़े होने पर यही नरेंद्र नाथ दत्त, स्वामी विवेकानंद बने ….