प्रतिष्ठानो में बाल श्रमिकों से कराई जा रही है मजदूरी

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कन्नौज ब्यूरो : इन दिनों शहरों में वाल श्रमिको की भरमार है जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से शिक्षा से दूर इन बच्चों का भविष्य अंधकार मय होता जा रहा है |

बताते चले कि तिर्वा रोड गुरसहायगंज में राकेश चाय बिक्रेता वाल श्रमिको का खुले आम उत्पीड़न कर रहा है लेकिन बिभागीय जिम्मेदारों को नजर नही आ रहा है बाल श्रमिक 13 बर्सिय दीपक पुत्र राजेश नट ने रो रो कर मीडिया को बताया कि राकेश दो हजार रु महीना देता है और लेट होने पर राकेश एवम् उसका पुत्र सूरज उसके साथ मारपीट करता है | पीड़ित ने बताया कि वह एक बार थाने भी जा चुका है जहाँ उसकी किसी ने नही सुनी |

मिडिया द्वारा नोकरी छोड़ने के सवाल पर उसने बताया कि मै गरीब हूँ पेट की खातिर नोकरी कर रहा हूँ | यह तो सिर्फ एक उदाहरण है ऐसे कई वाल श्रमिको का उत्पीड़न होता है लेकिन बिभागीय तंत्र बेखबर है | जबकि बाल श्रमिको से मजदूरी कराना क़ानूनी अपराध है लेंकिन राकेश जैसे लोग कानून को धता बताकर बाल श्रमिको का उत्पीड़न कर रहे है लगता है बिभागीय अधिकारी भी उन पर मेहरवान है अगर देखा जाये अधिकांश बच्चों का भविष्य बाल श्रमिक के रूप में झुलस रहा है | माँ बाप की गरीबी जहाँ इन बच्चों का भबिस्य चौपट कर रही है | इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है लेकिन गरीबी दूर करने एवम् बेहतर जीवन सबारने का सपना दिखाने बाली सरकारो की बेपरवाही के चलते इन पालनहारों का जीवन नरक बनने में इनकी कहीं अधिक जिम्मेदार माना जाये तो आश्चर्य नही होगा | इतना ही नही इन बाल श्रमिको को मुक्त कराने का अभियान कहीँ नजर नही आता है मजेदार बात तो यह है कि नेनिहलो से कराई जा रही मजदूरी पर स्थानीय प्रशाशन की नजर ना पड़ना गम्भीर एवम् चिंता का बिषय बन गया है | जब बाल श्रम अधिकारी से कई बार बात करने का प्रयास किया उनका फोन नही उठा |

रिपोर्ट – सुरजीत सिंह

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