बौद्ध सम्मेलन में दलाई लामा के हिस्सा लेने पर भड़का चीन, भारत को दे डाली चेतावनी

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पेइचिंग – बिहार में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के लिए भारत द्वारा तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को न्यौता भेजने के मामले को लेकर चीन ने भारत के प्रति बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत को चेतावनी देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हु चनयिंग ने कहा है कि भारत को ऐसे कृत्य से बचना चाहिए जिससे भारत और चीन के मध्य द्विपक्षीय रिश्ते प्रभावित हो।

चीनी सरकार की विदेश प्रवक्ता ने कहा है कि हाल के दिनों में भारत ने चीन की चिंताओं और विरोध को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए 14 वें दलाई लामा को भारत सरकार की तरफ से आयोजित किए गए अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में ना केवल बुलावा ही भेजा था अपितु उन्हें इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि भी बनाया गया था।

भारत के इस कृत्य से असंतुष्ट हुआ है चीन-
चीन की विदेश प्रवक्ता हु चनयिंग ने कहा है की भारत ने जिस तरह से 14वें दलाई लामा को भारत सरकार द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में सम्मिलित होने का निमंत्रण भेजा है उससे चीन बेहद असंतुष्ट हुआ है। उन्होंने कहा कि हम इसका पुरजोर विरोध भी करते हैं, हम भारत सरकार से यह गुजारिश करते हैं कि वह दलाई लामा समूह के चीन विरोधी अलगाववाद को समझें और तिब्बत के प्रति चीन की भावना और प्रतिबद्धता का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी चीजों से बचना चाहिए जो भारत व चीन के मध्य द्विपक्षीय रिश्तो को प्रभावित कर सकते हैं।

बिहार में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में शामिल हुए थे दलाई लामा-
आपको बता दें कि 17 मार्च को आयोजित बिहार के नालंदा जिले में स्थित राजगीर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सेमिनार में बौद्ध धर्म के 14वें दलाई लामा सम्मिलित हुए थे। वह न केवल इस कार्यक्रम में सम्मिलित ही हुए थे अपितु उन्होंने ही इस कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया था। आपको यह भी बताते चलते हैं कि इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए उन्हें भारत सरकार की तरफ से निमंत्रण भेजा गया था, इस कार्यक्रम में दुनिया भर के अलग-अलग देशों से बौद्ध सन्यासी तथा विद्वानों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था। इस सम्मेलन का नाम 21 वीं शताब्दी में बौद्ध धर्म था, यह सम्मेलन बिहार की राजधानी पटना से तकरीबन 100 किलोमीटर दूर स्थित राजगीर में आयोजित किया गया था। चीन इसी कार्यक्रम में दलाई लामा के सम्मिलित होने का विरोध कर रहा है।

पहले भी चीन ने किया था विरोध-
आपको बता दें कि ऐसा नहीं है कि पहली बार चीन ने दलाई लामा के कहीं आने जाने को लेकर विरोध किया हो। हाल ही में जब दलाई लामा ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था तब भी चीन ने भारत सरकार के समक्ष इस मामले को दृढ़ता के साथ उठाया था उस समय चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शु वांग नहीं कहा था कि चीन दलाई लामा का उन सभी विवादित क्षेत्रों में जाने का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने यह भी कहा था कि पूर्वी चीन-भारत सीमा को लेकर चीन का रुख बेहद स्पष्ट है। दरअसल आपको बता दें कि चीन यह मानता है कि दलाई लामा चीन विरोधी गतिविधियों में काफी सक्रिय रहे हैं ऐसे में उनका विवादित क्षेत्रों में आना जाना उसके लिए ठीक नहीं है।

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता है दलाई लामा-
चीन के आतंक से तंग आकर 1962 में दलाई लामा चीन छोड़कर भारत आ गए थे तभी से चीन उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता आया है। चीन का ऐसा मानना है कि दलाई लामा चीन को तोड़ने का हमेशा प्रयास करते रहते हैं। आपको बता दें की पिछले कुछ वर्षों में चीन ने दलाई लामा के साथ बातचीत करने का भी प्रयास किया था लेकिन 2012 में जब चीन की सत्ता शी जिनपिंग के हाथों में आ गई तब से चीन पहले की अपेक्षा दलाई लामा के प्रति और भी ज्यादा सख्त हो गया है।

अब चीन दुनिया के उन सभी देशों पर दलाई लामा की मेजबानी न करने के लिए दबाव बनाता रहता है, जहाँ भी दलाई का आना जाना होता है। हलाकि ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि कोई देश चीन के दबाव में आकर दलाई लामा की मेजबानी न करता हो।

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