भारत की इस कामयाबी के सदमे से उबर नहीं पा रहा है चीन : चीनी मीडिया

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प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी 23 मई, 2016 को तेहरान के सादाबाद महल में आयोजित स्‍वागत समारोह में ईरान के राष्‍ट्रपति, श्री हसन रूहानी के साथ।

चीनी मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार हाल ही में भारत और ईरान के बीच हुए चाबहार समझौते से चीन को बड़ा झटका लगा है, और इस झटके से चीन अभी तक उबर नहीं पाया है | रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और ईराक का चाबहार समझौता पाकिस्तान और चीन के ग्वादर बंदरगाह का जवाब है |

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उन्होंने कहा भारत का यह समझौता भारत भारत की महत्वकांक्षाओं का छोटा सा हिस्सा मात्र है वास्तविकता यह है कि भारत पश्चिमी एशिया और सेंट्रल एशिया में अपनी धाक जमाना चाहता हैं, इस समझौते के बाद से चीन इसलिए भी ज्यादा परेशां है क्योंकि चीन स्वयं भी चाबहार पोर्ट को विकसित करने की योजना बना रहा था, लेकिन भारत ने उसके इरादों पर पानी फेर दिया |

चाबहार दक्षि‍ण पूर्व ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थि‍त एक बंदरगाह है. इसके जरिये भारत, पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान के लिए रास्ता बनायेगा |
इसके जरिये भारतीय सामानों के ट्रांसपोर्ट का खर्च और समय एक तिहाई कम हो जायेगा |
ईरान मध्य एशि‍या में व हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से में बसे बाजारों तक आवागमन आसान बनाने के लिए इस पोर्ट को एक ट्रांजिट हब के तौर पर विकसित कर सकेगा |
अरब सागर में पाकिस्तान ने ग्वादर पोर्ट के जरिये चीन को सामरिक ठिकाना मुहैया कराया है, लिहाजा चाबहार को विकसित करते ही भारत को समुद्री रास्ते से व्यापार-कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा |
चाबहार से ईरान के मौजूदा रोड नेटवर्क को अफगानिस्तान में जरांज तक जोड़ा जा सकता है. इस हाइवे से कंधार, काबुल, हेरात और मजार-ए-शरीफ जैसे चार बड़े शहरों तक पहुंचना आसान हो जायेगा |

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