चीन ने दिए संकेत- तवांग के बदले भारत को मिल सकता है अक्साई चीन

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पेइचिंग- चीन और भारत के बीच लम्बे समय से चल रहे सीमा विवाद का समाधान निकालने के लिए चीन बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है | इस बात के सबूत हाल ही में चीन के एक पूर्व राजनयिक और सीमा विवाद को सुलझाने तथा भारत और चीन के मध्य होने वाली वार्ताओं का बीते एक दशक से नेत्र्तत्व करने वाले पूर्व वरिष्ठ राजनयिक दाई बिंगुओ ने एक इंटरव्यू में इस बात के संकेत दिए है |

तवांग के बदले में मिल सकता है अक्साई चीन-
आपको बता दें कि पूर्व वरिष्ठ राजनयिक दाई बिंगुओ ने अपने एक साक्षात्कार के दौरान कहा है कि चीन भारत के साथ हमेशा के लिए अपने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अपना कुछ हिस्सा छोड़ने के लिए तत्पर है लेकिन उसके बदले में भारत को भी कुछ हिस्सा छोड़ना होगा |

दरअसल आपको बता दें कि पूर्व वरिष्ठ राजनयिक दाई बिंगुओ का इशारा अरुणांचल प्रदेश के तवांग की तरफ था | तवांग भारत और चीन दोनों के लिए ही राजनैतिक तौर पर और सामरिक तौर दोनों ही तरीके से बेहद ही महत्त्वपूर्ण भू-भाग है | इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि यहाँ पर स्थित तवांग मठ भी भारत और चीन के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यहीं पर पंद्रहवीं शताब्दी में दलाई लामा का जन्म भी हुआ था |

चीन इस क्षेत्र को अपने अधिकार में लेकर तिब्बत पर अपना वर्च्चस्व कायम करना चाहता है लेकिन भारत के लिए इसे छोड़ना इतना अधिक आसान नहीं होगा | क्योंकि भारत और तिब्बत के बौद्ध अनुयायियों के लिए यह बेहद धार्मिक केंद्र है| हर एक बौध धर्म का अनुयायी यहाँ बड़ी ही श्रद्धा से आता है |

चीनी सरकार के बेहद नजदीकी है दाई –
आपको बता दें कि हालाँकि अभी तक चीनी सरकार की तारफ से कोई भी आधिकारिक बयान जारी कर इस तरह की बात नहीं कही गयी है लेकिन बावजूद इसके आपको यह भी बता देते है कि दाई को चीनी सरकार के बेहद करीबी माना जाता है और यह भी कहा जा रहा है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के कभी भी वरिष्ठ चीनी राजनयिक इस तरह का बयान नहीं देंगे |

आपको बता दें कि दाई बिंगुओ ने कुछ इसी तरह की बातें बीते साल आई अपनी एक किताब में कही थी | यह भी बताते चलते है कि, 1962 के युद्ध के बाद चीन ने इस क्षेत्र से पीछे हट गया था | तवांग पर चीन का अधिकार तिब्बती बौद्ध केंद्रों पर उसकी पकड़ और मजबूत करेगा |
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