भारत के बढ़ते वर्चस्व के आगे झुका चीन, पहली बार पाक प्रशासित कश्मीर की जगह पाक अधिकृत कश्मीर शब्द का किया इस्तेमाल

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Xi-Jinping

भारत की लगातार बढती प्रतिष्ठा और वर्चस्व के मद्दे नज़र भारत का धुर विरोधी रहा चीन भारत को लेकर अपना रुख बदलता नज़र आ रहा है, चीन के सरकारी अखबार जो हमेशा से ही पाक अधिकृत कश्मीर को पाक प्रशासित कश्मीर बताते रहे हैं पहली बार अपने लेखों में पाक अधिकृत कश्मीर शब्द का प्रयोग करते नज़र आ रहे हैं |

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने आज भारत और पाकिस्तान को लेकर चीन के रुख पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कश्मीर मामले पर चीन किसी भी प्पक्ष या विपक्ष में नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच चल रही इस खींच तान के कारण पाक अधिकृत कश्मीर विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है | यह पहली बार था जब चीन के सरकारी अखबार ने पाक प्रशासित कश्मीर की जगह पाक अधिकृत कश्मीर शब्द का इस्तेमाल किया |

अखबार ने कहा कि POK के विकास में पीछे छूट जाने का सबसे बड़ा कारण है कि वहां का माहौल निवेश के लिए अनुकूल नहीं है, और आज भी POK पूरी तरह से खेती पर ही निर्भर है |

एक दूसरे सरकारी अखबार ने हाल ही में मीडिया में आई फोटो जिसमें पाक और चीनी सैनिकों को एक साथ POK में गश्त लगाते दिखाया गया था का खंडन करते हुए कहा कि ये तस्वीरें पाकिस्तान और चीन बॉर्डर की हैं जिन्हें दिखाकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है |

आज के अपने लेख में अखबार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बन रहे चीन-पाकिस्तान इकनोमिक कॉरिडोर पर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की चिंताओं पर कहा कि चीन ने भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के साथ वित्तीय समझौते किये हैं और चीन किसी भी एक देश के पक्ष में नहीं है, भारत की ओर से चीन-पाक इकनोमिक कॉरिडोर को लेकर हो रहे विरोध के चलते चीन इससे पीछे नहीं हट सकता |

भारत के इस इकनोमिक कॉरिडोर का विरोध करने के बजाय पाक के साथ मिलकर किसी समाधान पर पहुँचने की कोशिश करने चाहिए | इस इकनोमिक ना सिर्फ पाक और चीन बल्कि इससे जुड़े भारतीय क्षेत्र को भी लाभ पहुंचेगा, स्तःनीय लोगों के भले और विकास के लिए भारत सर्ज्कार को इस कॉरिडोर को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए और साथ आकर इस कॉरिडोर से भारत को होने वाले वित्तीय लाभ का फायदा उठाने की कोशिश करनी चाहिए |

भारत पाक और चीन के बीच संयुक्त वित्तीय सहभागिता कश्मीर मुद्दे हा हल ढूँढने में मददगार साबित हो सकती है और इसके लिए भारत सरकार को राष्ट्रहित में दूरदर्शिता अपनानी होगी |

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