आओ सब मिल कर करे उस देवी को प्रणाम, जिसको हम सब कहते है….????

0
240

मॉ तुझे प्रणाम,
आज मातृ दिवस (Mothers day) है | “शुभ कामनाएं” और “बधाई” का दौर प्रारम्भ हो चुका है |

”मैं रात भर जन्नत की सैर करता रहा दोस्तों, सुबह जब नींद खुलीं तो सर माँ के पैरो पे था..”

हमारे जीवन में माँ की भूमिका हमेशा अलग होती है और जीवन में शामिल दूसरे लोगों से अनमोल होती है। अवश्य ही माँ का पूरा दिन हमारी जरुरतो को पूरा करने बीत जाता है वो अपने बच्चों से कुछ भी वापस नहीं पाना चाहती है बल्कि वो उनको खुले दिल से प्यार करती है।

बच्चे होने के नाते हम भी माँ से प्यार करते है और दिल से उसका ध्यान करते है। लेकिन उसके प्यार से हमारे प्यार की तुलना नहीं की जा सकती। साथ रहने वाले भगवान के रुप में सभी के जीवन में इस दुनिया में माँ सबसे अलग होती है जो अपने बच्चों के सभी दुख ले लेती है और उन्हें प्यार और संरक्षण देती है।

माँ ही वो इंसान है जो अपने बच्चों के बुरे दिनों और बीमारीयों में उनके लिये रात-रात भर जागती है। वो उनकी हर खुशी में शामिल होती है और उनके हर पसंद-नापसंद को समझती है। वो हमेशा अपने बच्चों को सही राह पर आगे बढ़ने के लिये मार्गदर्शन करती है और जीवन में सही कार्य करने को प्रेरित करती है।

वो हमारी पहली अध्यापक होती है जो जीवन के हर कदम पर हमें नयी नयी सीख देती है और हमें सही गलत का अंतर बताती है वो हमेशा हमें अनुशासन का पालन करना, अच्छा व्यवहार करना और देश, समाज, परिवार के लिये हमारी जिम्मेदारी और भूमिका को समझाती है।

आम तौर पर देखा जाता है कि दो पुरुषों की बहस या लड़ाई में “गालियॉ” मां – बहनों की ही दी जाती हैं |

“शुभकामनाएं” व “बधाई” देने से पहले एक “वचन” स्वयं से लीजिये कि हम आपसी वाद-विवाद के समय घर बैठी बेटे के सकुशल लौटने की दुआ कर रही “मॉ” को कतई कोई “अपशब्द” नहीं बोलेंगे साथ ही ऐसा करने वाले को भी टोकेंगे |

समझ से परे है कि दो पुरुषों की लड़ाई में “माँ — बहनों” को “गालियॉ” क्यों दी जाती हैं ? ये बेहद “शर्मनाक”,”घटिया” और “दुखद” है | इससे बचें |

“मातृ दिवस” को शुभ कामनाएं व बधाई देकर मात्र दिवस में ही न निपटाएं |
अच्छा “चिन्तन” करें और एक अच्छे “इन्सान” बनकर दूसरों की मॉ – बहन को “सम्मान” देने की “आदत” डालें |

अवनीश मिश्रा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here