नहीं जलाए जाएंगे पुआल, बनेगा कंपोस्ट

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उरई : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद पुआल को लेकर सरकार ने नई रणनीति बनाई है। अब खेत के पुआल जलाए नहीं जाएंगे। इससे कंपोस्ट बनाया जायेगा। कंपोस्ट बनाने के लिए गड्ढा खुदाई का काम मनरेगा के तहत होगा।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब में किसान द्वारा फसलों के अवशेष जला देने से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या पैदा हो रही थी। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश सरकारों को इस समस्या से निपटने के सख्त निर्देश दिए थे। सरकार की ओर से कृषि अवशेष जलाने पर जुर्माने के भी आदेश दिए गए थे। कृषि अवशेष को खेती के ही काम में लाया जाए। इसके लिए पूर्व में कृषि विभाग से सुझाव मांगे गए थे। इस सुझाव पर सरकार ने भी मुहर लगा दी है। इसके तहत कृषि अवशेष से कंपोस्ट बनाया जाएगा। कंपोस्ट बनाने के लिए एक बीघे के खेत में 10 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 5 फीट गहरा गड्ढा खुदवाया जाएगा। इस खुदाई का भुगतान मनरेगा के तहत होगा। इस गड्ढे में कृषि अवशेष और गोबर से कंपोस्ट खाद तैयार होगी। खाद तैयार करने के लिए कृषि विभाग किसानों को ट्रेनिंग भी देगा।

मनरेगा से होगा गड्ढा खुदाई भुगतान
खेत में कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए गड्ढे की खुदाई के लिए मनरेगा तहत इसका भुगतान होगा। मनरेगा के परियोजना निदेशक का कहना है कि इच्छुक किसानों के खेतों में गड्ढा खुदवा दिया जाएगा। जिससे किसान स्वयं ही कंपोस्ट खाद तैयार करने लगेंगे। इससे प्रदूषण पर रोक लगेगी और रसायनिक खादों का प्रयोग कम होगा।

30 फीसदी बचेगी यूरिया
कृषि उप निदेशक अनिल पाठक का कहना है कि एक हेक्टेयर में पांच बोरी यूरिया का प्रयोग किया जाता है। यदि हम गेहूं की बात करें तो प्रति हेक्टेयर पांच बोरी यूरिया का प्रयोग किया जाता है। कंपोस्ट खाद का प्रयोग करने से 30 फीसदी यूरिया बचेगी। इसके अलावा सल्फेट 30 फीसदी कम प्रयोग किया जा सकेगा। यदि किसान एक बीघे में पांच से 10 बोरी यूरिया कंपोस्ट का प्रयोग करता है तो उसे रसायनिक खाद के मद में 15 सौ से दो हजार रुपए तक सीधी बचत होगी।

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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