पर्यावरण संरक्षण से ही भारतीय संस्कृति का संरक्षण है

0
94

सुल्तानपुर(ब्यूरो)- पर्यावरण संरक्षण से ही भारतीय संस्कृति का संरक्षण है । पौध रोप के हम भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं । यह बातें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार पाण्डेय ‘साहित्येन्दु’ ने कहीं । श्री साहित्येन्दु अशोका प्ले स्कूल व सरप्राइज कोचिंग सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विश्व पर्यावरण दिवस गोष्ठी को बतौर अध्यक्ष सम्बोधित कर रहे थे ।

गोष्ठी के मुख्यअतिथि पं. केशव प्रसाद मिश्र ने कहा कि हमारे आस पास का वातावरण शुद्ध रहे आस पास की नदियां साफ रहें इसपर ही विशेष ध्यान देने की जरूरत है । विशिष्ट अतिथि आशुकवि मथुरा प्रसाद सिंह ‘जटायु’ ने कहा कि प्रकृति से निकटता भारतीय दर्शन की विशिष्ट पहचान रही है । मानवता तभी बचेगी जब प्रकृति बचेगी । प्रकृति को हम जितना दूषित करेंगें उतना ही संकट हमें झेलना पड़ेगा ।

गोष्ठी के विशिष्ट अतिथि युवा साहित्यकार ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह ‘रवि’ ने कहा – जीवनशैली में बदलाव करके प्रदूषण को कम किया जा सकता है । हमें यह तय करना पड़ेगा कि हमारे द्वारा कमसे कम प्रदूषण फैले । ऐसा करके ही हम सार्थक काम कर सकते हैं अन्यथा गोष्ठियों से पर्यावरण का भला होने वाला नहीं है ।

ज्ञानेन्द्र जी ने विश्व पर्यावरण दिवस की प्रासंगिकता, महत्त्व और भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।गोष्ठी का संचालन अवधेश नरायण पाण्डेय व आभार ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक अंकित कुमार पाण्डेय ने किया ।

इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न प्रजाति के दर्जन भर पौधे रोपे गये । इससे पूर्व विद्यार्थियों ने वृक्ष और उनसे लाभ के बारे में चर्चा की ।

रिपोर्ट-संतोष यादव

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY