माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा कराया जा रहा निर्माण कार्य

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बबुरी/चंदौली(ब्यूरो)- एक तरफ सरकार जहां तालाबों कुंडों को अतिक्रमण मुक्त कराने हेतु प्रयासरत है वही राजस्व विभाग के अधिकारियों व ग्राम प्रधान की मिलीभगत से तालाब के भीटे पर अतिक्रमण कर बारात घर बनवाया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सांसद विकास निधि से ग्राम सभा बबुरी को एक बारात घर मिला था जिसे ग्राम प्रधान द्वारा निर्धारित जमीन पर बनाना था पिछले 2 सालों से ग्राम प्रधान द्वारा कोई जमीन उपलब्ध न करा पाने के कारण वह लंबित पड़ा था| इसी बीच उनकी निगाह बबुरी के प्राचीन पोखरे के भीटे पर पड़ी जिसे सन 2008 09 में तत्कालीन एसडीएम ने उस जमीन पर बन रहे मंडी समिति पर यह कहते हुए स्थगन आदेश दिया कि किसी भी तालाब या पोखरे को अतिक्रमण कर उस पर कोई निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता परंतु वर्तमान प्रधान राजस्व विभाग के कर्मियों को मिलाकर उक्त जमीन को सरकारी बता कर निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिया जबकि सम्माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था हिंच लाल तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व जगपाल बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के तहत किसी भी तालाब पोखरो कुओं जलचर इत्यादि के किनारों भी तो पर  अतिक्रमण कर कोई भी निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता।

माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था के विपरीत जाकर स्थानीय प्रशासन के सहयोग से वर्तमान ग्राम प्रधान बबुरी के अति प्राचीन पोखरे के किनारों पर अतिक्रमण कर बारात घर का निर्माण करा रहे हैं जबकि ग्राम सभा बबुरी के पास ग्राम सभा की लगभग 15 से 20 एकड़ जमीन है उसके बावजूद सार्वजनिक विवाह घर का निर्माण उन जमीनों पर न करा कर तालाब की भीटे पर अतिक्रमण कर करा रहे हैं जोकि सोचनीय है।

कुछ स्थानीय लोगों ने इसका विरोध भी किया जिसे ग्राम प्रधान ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से दबा दिया और बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर यहां निर्माण कार्य कराया जा रहा है उन लोगों ने जब यह पूछा कि इस जमीन पर पूर्व में जब पूर्व में जब मंडी समिति का कार्य प्रारंभ होने जा रहा था तो आपने भी तो इसका विरोध किया था कि तालाब के बेटे पर मंडी समिति नहीं बन सकती है इससे तालाब गंदा होगा वह नहाने योग्य नहीं रह पाएगा और आज अपने ही इसपर अतिक्रमण कर निर्माण करा रहे हैं। लोगों ने कहा कि पोखरे के किनारे पर केवल वही एक ऐसी जमीन है जिस पर बबुरी में होने वाले सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे राम कथा गायत्री पूजा दुर्गा पूजा इत्यादि कार्यक्रम संपन्न होता है वह अब कहां होगा लोगों के बीच यह चिंता बनी हुई है। इसके बारे में जब कुछ बुजुर्ग लोगों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि तालाब के बाद की जो जमीन बजती है वह भी तालाब की ही है अर्थात तालाब का भीटा।

रिपोर्ट – रोहित वर्मा

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