धड़ल्ले से जारी है गुटखा व पान मसाला का सेवन

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करहल (मैनपुरी)। प्लास्टिक थैलियों की तरह गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर रोक का सुप्रीम कोर्ट का मन्शा पूरा नहीं हो सका है। खाद्य संरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत देश भर में तम्बाकू युक्त गुटखा और पान मसाला को हानिकारक खाद्य पदार्थ की श्रेणी में लाकर इनकी बिक्री को पूर्ण प्रतिबंधित किया गया। इसी के तहत यूपी सरकार ने भी पहली अप्रैल 2013 से राज्य में इन तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फरमान जारी किया। मगर इनके निर्माताओं ने जल्द ही इस अदालती व सरकारी फरमान का तोड़ निकाल लिया। तम्बाकू मिश्रित गुटखा और पान मसालों की बिक्री तो बंद हो गई लेकिन उनकी जगह सादा पान मसाला के पाउच मार्केट में आ गये और तंबाकू अलग से पैंकिंग में आ गई है।

करहल क्षेत्र में सभी पुरानी जानी पहचानी कंपनियों के पान मसाला ब्रांड बाजार में पहले की तरह ही छाए हुए हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मसाला और तंबाकू के पाउच अलग अलग मिल रहे हैं। पहले से महंगे भी बिकने लगे हैं, ये तम्बाकू व मसाला पाउच। पर इनके सेवन में किसी प्रकार की कोई कमी कतई नहीं आई है। इनके प्रेमी पान मसाला व तम्बाकू के पाउच अलग अलग खरीदकर उन्हें मिक्स करके खुलेआम इनका सेवन कर रहे हैं। कोई रोक टोक अब इन पर नहीं है। दुकानदार पहले की तरह से ही पुरानी कंपनियों के विभिन्न ब्रांडों के पाउच की लड़ियां अपनी दुकानों पर लटकाकर बेच रहे हैं। अंतर केवल इतना है कि मसाला पाउच अब सादा हैं और तम्बाकू अलग से बिक रही है। इन्हें सेवन करने वालों की कोई कमी नहीं है। युवा, पुरुष व महिलाएं इनका सेवन पहले की भांति ही कर रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में खब्बू कर्मचारी मुंह में मसाला भरे रौंथ मारते और अपनी सीट के पास रखे कूड़ेदान में पिच पिच करते कभी भी देखे जा सकते हैं। युवा भी तम्बाकू मिक्स करके पान मसाला मुंह में भरे पहले की तरह ही नजर आते हैं। जाहिर है, इन पान मसाला से जनस्वास्थ्य को जो नुकसान पहले होता था, वह अब भी हो रहा है। देश की शीर्ष अदालत का पान मसाला और गुटखा पर पाबंदी लगाने का मकसद पूरा नहीं हो सका है।
रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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