राजस्थान में गायों की निरंतर मौत से सरकार की मंशा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह, नज़र नहीं आ रहे गौरक्षक दल |

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राजस्थान के हिंगोनिया गौ शाला में गायों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है, हिंगोनिया गौ शाला में पिछले 2 दिन में 90 गायों की मौत और पिछले 2 हफ़्तों में 500 से ज़्यादा गाय के मरने की मौत हो गयी है,

गायों की इस सिलसिलेवार मौत पर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है, हिंगोनिया गौ शाला में 8000 से ज़्यादा गायें है और यहां का सालाना बजट 20 करोड़ रुपये है. लेकिन पिछले २ हफ्ते से यहां कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद गायों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया है,

कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण मिट्टी और कीचड़ इक्कट्ठा होने और गोबर साफ़ नहीं होने की वजह से वहां गंदगी इकट्ठा हो गयी है. कई गायें दल दल में फंस कर मर गई हैं |

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गायों की सिलसिलेवार मौत के पीछे भ्रष्टाचार की जांच कर रही है, अपनी शुरुवाती जांच में एसीबी ने पाया है कि गायों की इस दुर्दशा और मौत की सबसे बड़ी वजह है गौशाला का कुप्रबंधन है । गौशाला में सुपरिटेंडिंग इंजीनियर से लेकर निदेशक तक के अधिकारी तैनात है। लेकिन हैरानी ये कि उनकी मॉनिटरिंग एक कपांउडर स्तर का कर्मचारी कर रहा है।

गौरतलब है कि राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य है जहां गायों की देखभाल के लिए गोपालन मंत्रालय बनाया गया है पर गायों की यह दुर्दशा सरकार की मंशा पर कई सवाल खड़े कर रही हैं 17 पशुचिकित्सक, 40 नर्सिंगकर्मी समेत 60 कर्मचारी और आईसीयू के बावजूद गायों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है पर अभी तक किसी भी गौ रक्षक दल ने गायों की ऐसी दुर्दशा के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई है |

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