2015 कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की प्रमुख उपलब्‍धि‍यां |

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The Union Minister for Finance, Corporate Affairs and Information & Broadcasting, Shri Arun Jaitley addressing at the inauguration of the Resurgent Rajasthan Partnership Summit 2015, in Jaipur on November 19, 2015.
The Union Minister for Finance, Corporate Affairs and Information & Broadcasting, Shri Arun Jaitley addressing at the inauguration of the Resurgent Rajasthan Partnership Summit 2015, in Jaipur on November 19, 2015.

चालू वित्‍त वर्ष में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की प्रमुख उपलब्‍धि‍यां

निम्‍नलिखि‍त रहीं :

कंपनी (संशोधन) अधि‍नियम, 2015

  • (2015 का 21) को 26 मई, 2015 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया है और यह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्‍ध है। संशोधन अधिनियम ने कंपनियों/हितधारकों के सामने आने वाली उन व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर कर दिया है जिनका सामना उन्‍हें कंपनी अधि‍नियम, 2013 के कुछ विशेष प्रावधानों के अनुपालन के वक्‍त करना पड़ता है। इन कठिनाइयों की ओर ध्‍यान उद्योग मंडलों और अन्‍य एजेंसियों ने दिलाया था। इसका उद्देश्‍य ‘कारोबार करने में और ज्‍यादा सुगमता’ सुनिश्‍चि‍त करना है।
  • संशोधन अधिनियम की धाराओं 13 और 14 को छोड़कर संशोधन अधिनियम की अन्‍य सभी धाराएं 29 मई, 2015 से प्रभावी कर दी गई हैं। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निर्धारित नियमों के निम्‍नलिखि‍त पांच सेटों में किए गए म‍हत्‍वपूर्ण परिवर्तनों को भी इन ति‍थि‍यों से अधिसूचित किया गया है:-
  • कंपनी (निगमन) नियम, 2014
  • कंपनी (शेयर पूंजी और डिबेंचर) नियम, 2014
  • कंपनी (शुल्कों का पंजीकरण) नियम, 2014
  • कंपनी (घोषणा और लाभांश का भुगतान) नियम, 2014
  • कंपनी (पंजीकरण कार्यालय और शुल्क) नियम, 2014

कंपनी कानून समिति (सीएलसी)

मंत्रालय ने 05 जून, 2015 को एक कंपनी कानून समिति का गठन किया है, जिसके जिम्‍मे निम्‍नलिखि‍त कार्य दिए गए हैं :-

(i) कंपनी अधिनियम, 2013 के कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दों के बारे में सरकार से सि‍फारिशें करना |

(ii) उपर्युक्‍त (i) के दायि‍त्‍व के साथ-साथ  दिवालियापन कानून सुधार समिति, सीएसआर पर गठित उच्चस्तरीय समिति, विधि आयोग और अन्य एजेंसियों से प्राप्‍त सिफारिशों पर गौर करना।

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के सचिव समिति के अध्‍यक्ष हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश सुश्री रेवा खेत्रपाल, आईसीएआई, आईसीएआई (कॉस्‍ट) के अध्‍यक्ष और सीआईआई तथा फिक्की के प्रतिनिधि समिति के अन्य सदस्य हैं। एमसीए में संयुक्त सचिव (नीति) इस समिति के सदस्य-संयोजक हैं। समिति ने सीएलसी के हर सदस्‍य की संयोजकता/अध्‍यक्षता में छह समूहों का गठन किया है और इसके सदस्‍य उद्योग जगत से चुने गए हैं एवं कुछ विशेषज्ञ भी इसके सदस्‍य हैं। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य विचार-विमर्श की प्रक्रिया के आधार को व्‍यापक बनाना है। सीएलसी ने पांच समूहों की प्रमुख सिफारिशों पर विचार-विमर्श का काम पूरा कर लिया है और इसके द्वारा अपनी पहली बैठक के छह माह के भीतर अपनी सिफारिशें पेश कर दिए जाने की संभावना है।

कंपनियों के विभिन्न वर्गों के लिए धारा 462 के तहत रियायतें

  • मंत्रालय ने 5 जून, 2015 को कंपनी अधिनियम, 2013 (अधिनियम) की धारा 462 के तहत अंतिम अधिसूचनाएं जारी की हैं, जिनमें अधिनियम के विभि‍न्‍न प्रावधानों के तहत (i) निजी कंपनियों; (ii) सरकारी कंपनियों; (iii) धारा 8 में आने वाली कंपनियों और (iv) निधि‍यों को रियायतें देने का उल्‍लेख किया गया है। ये अधिसूचनाएं मंत्रालय की वेबसाइट www.mca.gov.in पर उपलब्‍ध हैं।

कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर)

  • पूर्व केंद्रीय सचिव श्री अनिल बैजल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी, जिसे कंपनियों के स्तर के साथ-साथ सरकारी स्‍तर पर कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) से जुड़ी नीतियों के कार्यान्वयन की प्रगति पर नजर रखने के उपाय सुझाने का जिम्‍मा सौंपा गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट 22 सितंबर, 2015 को सौंप दी। समिति की रिपोर्ट को मंत्रालय की वेबसाइट पर डाल दिया गया है।

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