हाईकोर्ट ने जालौन के एसपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में बुलाकर क्यों जताई नाराजगी, 10 को उन्हें फिर जाना पड़ेगा इलाहाबाद

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उरई : नदीगांव के बाहुवली बसपा नेता अभिमन्यु सिंह उर्फ डिम्पल के मामले में शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ के सामने इलाहाबाद में जालौन जनपद के पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगैन को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा। इस मामले में उन्हें 10 मार्च को अदालत ने फिर व्यक्तिगत रूप से बुलाया है। हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखकर जिले के पुलिस अधिकारियों का फिलहाल पसीना छूट गया है।

इस मामले में याची विवेक कुमार सिंह की ओर से हाईकोर्ट के जानेमाने युवा अधिवक्ता अजय सिंह सेंगर ने पीआईएल दाखिल की थी। मुख्य न्यायाधीश दिलीप डी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की डबल बैंच के सामने जनहित याचिका में अजय सिंह सेंगर ने यह मुददा रखा कि डिम्पल के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास, डकैती जैसे संगीन अपराधों के 62 मुकदमें हैं। उन्हें पिछली बार जब जमानत मंजूर की गई थी तो कहा गया था कि अगर अब उनका नाम किसी अपराध में शामिल होता है तो उनकी जमानतें रदद कर दी जायेगीं। इसके बावजूद 2015-16 में उन पर हत्या और हत्या के प्रयास के मुकदमें दर्ज हुए। इस मुकदमें में न केवल उनकी गिरफ्तारी नही हुई बल्कि अन्य मुकदमों में मिली जमानत निरस्त कराने के लिए भी पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई मूव नही की गई।

हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से संज्ञान में लिया और आज जालौन के एसपी स्वप्निल ममगैन को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में खड़ाकर उनसे नाराजगी प्रकट की। साथ ही उनसे कहा कि वे 10 मार्च को शपथ पत्र लेकर आयें कि जिस मुकदमें में डिम्पल वांछित हैं उसमें उनकी गिरफ्तारी के क्या प्रयास किये गये और जिन मुकदमों में वे जमानत पर हैं उनमें जमानत निरस्त कराने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाये हैं। एसपी स्वप्निल ममगैन के वापस लौटने के पहले ही जिले की पुलिस में हाईकोर्ट के तेवरों के कारण खलबली मची हुई है।

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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