क्रिकेट विश्वकप के ‘मैन ऑफ़ द सीरीज’ आज पेट पालने के लिए पशु चराने को मजबूर है

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http://jamiekrugauthor.com/owner/raspisanie-otklyucheniya-goryachey-vodi-2017-bryansk.html расписание отключения горячей воды 2017 брянск क्रिकेटर 1998 में दृष्टिबाधित खिलाड़ियों का क्रिकेट विश्व कप में भारतीय  टीम सेमीफाइनल तक पहुंची थी और गुजरात के भालाजी डामोर  मैन ऑफ द सीरिज चुने गए थे सेमीफाइनल में द. अफ्रीका से  हारने के बाद भी तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन ने  भालाजी की तारीफ की थी और उन्हें सम्मानित किया था। उन्होंने  एक ऑलराउंडर की भूमिका निभाते हुए 125 मैच में 3,125 रन  बनाए और 150 विकेट भी लिए। विकेट लेने में उनकी बराबरी देश  का कोई दृष्टिहीन खिलाड़ी नहीं कर पाया है। आज उन्हें अपना और  परिवार का पेट पालने के लिए पशु चराने पर मजबूर हैं।

http://sneps.com.br/library/kak-sdelat-masku-bendi.html как сделать маску бенди एक खबर के मुताबिक, भालाजी का कहना है, विश्व कप के बाद मुझे उम्मीद थी कि कहीं नौकरी मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अपाहिज या खिलाड़ियों का कोटा भी काम नहीं आया। आज भालाजी और उनके भाई के पास अरावली जिले के पिपराणा गांव में महज एक एकड़ जमीन है, जो दो परिवार पालने में पूरी नहीं पड़ती। दृष्टिबाधित होने के कारण दूसरों के खेतों में भी काम नहीं मिलता है। उनकी पत्नी अनू खेती के काम करती है। दोनों का चार साल का बेटा सतीश भी है। एक कमरे के घर में सभी को गुजारा करना पड़ता है। ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भूषण पुनानी मानते हैं कि विशेष श्रेणी के इन खिलाड़ियों के प्रति सरकार ज्यादा ध्यान नहीं देती हैं।

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