योगी जी के शासन में बढ़ता नजर आ रहा है अपराध

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प्रतीकात्मक

वाराणसी(ब्यूरो)- अपराधियों के क्रिया-कलापों का काला चिट्ठा उपलब्ध होने के बाद भी नाम सामने आने के डर से लोग पुलिसकर्मियों को कुछ भी सामने आकर बताने में कतराते हैं। पहले थानों में लगी शिकायत पेटिका पुलिस तक गोपनीय सूचनाएं पहुंचाने का प्रमुख साधन हुवा करती थी।

सूत्रों की मानें तो ज्यादातर लोग अब पुलिस पर ही अपराधियों का मुखबिर होने का संदेह करते हैं! कोई भी गोपनीय शिकायत पत्र , पेटिका के माध्यम से आम जनता, पुलिस या किसी भी विभाग के उच्च अधिकारियों से कर सकें। इसके लिए फिर से शिकायत पेटी थाना हो या फिर कोई भी सरकारी महकमा, उसके आस पास या बाहर लटकाए जाने की आवश्यकता है। शिकायत से सम्बंधित विभाग के उच्चाधिकारी द्वारा चयनित कारिंदे को ही पेटिका का ताला खोल सभी शिकायतों की गंभीरता से जांच करने का अधिकार प्रदान करने की इजाजत दी जानी चाहिए।

शिकायत की पुष्टि होने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे शिकायतकर्ता को अपना नाम गोपनीय रखना है तो वह पेटिका में चुपचाप अपनी समस्या बता सकता है। जिससे कहीं भी अवैध खनन हो रहा हो, रंगदारी मांगी जा रही हो, जुआ हो रहा हो या गोरखधंधा हो रहा हो तो शिकायतकर्ता शिकायत पेटिका में अपना पत्र डाल सकता है।

रिपोर्ट- सर्वेश कुमार यादव 

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