अपराधियों का राजनीति में रहना ही भारत की दुर्दशा का प्रमुख कारण

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हिंदुस्तान, भारत, आर्यावर्त न जाने कितने नामों से पुकारा जाता रहा है, हमारा यह प्यारा सा मुल्क, हिमालय की ऊँची-ऊँची चोटियाँ हमारी रक्षा के लिए अनेकों-अनेक वर्षों से हमारे उत्तर में प्रहरी की तरह से खड़ी हुई है, वही दक्षिण में हिन्द महासागर की अनंत गहराई और ऊंची-ऊंची उठती लहरें, हमें न केवल सुरक्षा ही प्रदान करती है अपितु व्यापार के लिए रास्ते भी खोलती है। कभी अपने ज्ञान और समृद्धि की वजह से समूची दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने वाला भारत आज राजनीति में अपराधियों के बढे दबदबे के कारण दिन प्रति दिन कमजोर होता जा रहा है।

जिस देश ने समूची दुनिया को नारी का सम्मान करने की शिक्षा दी आज वही दुनिया में सबसे ज्यादा तो नहीं कह सकते लेकिन हाँ बहुत बड़ी तादाद में रेप और मर्डर हो रहे है। हिन्दुस्तान में हर छह घंटे में एक लड़की के साथ दुष्कर्म होता है। और यह कोई कपोल काल्पनिक बात नहीं है बल्कि यह NCRB यानी की नेश्नल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुतकिये गए आंकड़े हैं, जिसका जिक्र हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी किया गया था।

भारत की यह हालत क्यों ?
आज भारत की जो हालत है वह इस तरह की क्यों है ? क्या हम कभी समझने की कोशिश करते हैं ? जिस देश में नारी को सम्मान नहीं उसकी पूजा की जाती थी आज वहां नारी की यह हालत है, जिस देश में झूठ बोलने को ही पाप कहा जाता था वहां घोटाले हो रहे है और वह भी बड़े-बड़े। हमारे पूर्वजों ने समंदर की लहरों पर पुल बांधा था जो न जाने कितने बर्षों से आज भी हमारे ज्ञान का बखान करता समंदर की लहरों के मध्य खड़ा हुआ हमारी कीर्ति का बखान कर रहा है और आज का दौर है जब हम बनारस में एक ओवर ब्रिज बना रहे होते है तब उसका एक हिस्सा जमींदोस हो जाता है और देश के 15 लोग चिर निद्रा में लीन हो जाते है, कलकत्ता में ब्रिज बनता है और फिर गिर जाता है न जाने कितने लोग हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो जाते है।

इस तरह के न जाने कितने सवाल है जो मष्तिष्क में भरे पड़े हुए है, लेकिन उनके जब भी हम जवाब तलाशने की कोशिश करते है, जब कभी हम यह जानने की कोशिश करते है कि आखिर यह सब क्यों हो रहा है और कैसे हो रहा है कि जब हम एक व्यक्ति को दंड दिलवाने की कोशिस करते है, सारे सबूत भी इक्कठे कर लेते है लेकिन वह बच जाता है और जब हम यह पता करने की कोशिश करते है कि आखिर यह बचा कैसे तो हमें एक चेहरा दिखाई पड़ता है, सफ़ेद खादी पहने एक व्यक्ति जिसे लोग राजनेता कहते है।

सुधार भला कैसे-
अभी तक तो ऐसा ही चल रहा है, राजनेता अपनी राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए पहले गुंडे और बदमाश पालते थे, आज गुंडे और बदमाश अपनी निजी महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए राजनेता या तो पालते है या फिर राज नेता बन जाते है। हालाँकि दोनों ही मामलों में बात एक जैसी ही है, लेकिन पहले फिर भी ठीक था कि नेताओं को भय था अपनी प्रतिष्ठा का लेकिन आज खुलेआम वह एक चलन सा बन गया है।

नेताओं के ऊपर आपराधिक मुक़दमे, सेना के एक सिपाही के सीने पर लगे मेडल जैसे देखे जा रहे है।  लोगों का कहना तो यहाँ तक है कि जिस राजनेता के ऊपर जितने अधिक आपराधिक मुक़दमे वह उतना ही बड़ा राजनेता माना जाता है। लम्बे समय से इस मामले पर हिन्दुस्तान में बात होती रही है, हिन्दुस्तान ही नहीं हिंदुस्तान के बाहर भी तमाम देशों में इस मामले पर जोरो से मांगे उठी है, कुछ ने ठीक किया है और कही कही आज भी हालात हिंदुस्तान जैसे ही है।

हमारे देश की संसद अनेकों अनेक प्रावधान बनाने में महारत हासिल किये हुए है, जरा सी बात दलितों और सवर्णों की आज जाए यहाँ तत्काल एक नया नियम प्रस्तुत कर दिया जाता है, भले ही उस पर देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एतराज ही क्यों न जताया हो।  यहाँ जरा सी बात हिन्दू और मुस्लिम की आ जाये एक नया कानून हम बनाकर उसे राज्यसभा और लोक सभा दोनों से पारित भी करवा लेंगे लेकिन देश की किसी भी पार्टी ने आज तक इस मामले पर हिम्मत नहीं दिखाई है क़ी जो आपराधिक छवि के लोग है, उन्हें चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा, ऐसे लोगों को हम बाहर करेंगे।

आज के हालात यह है कि हमें राजनेता या फिर गुंडे में अंतर ही नहीं पता है।  क्योंकि ज्यादातर लोगों के ऊपर क्रिमिनल केस है, क्रिमिनल केस तो छोटी बात है, बहुतायत लोग ऐसे है जिनके ऊपर हीनियस क्राइम के चार्ज लगे हुए है लेकिन फिर भी वह आज भी बकायदे चुनाव लड़ रहे है और जीत रहे है, लम्बे-लम्बे भाषण दे रहे है, खुद भ्रस्टाचार के आरोप में जेल की सजा काट रहे है और बेशर्मी की हद देखिये कि दूसरी पार्टी पर भ्रस्टाचार का ही आरोप लगा रहे है और कह रहे है कि आप हमें वोट दीजिये हम अगर सत्ता में वापस आये तो भ्रस्टाचार मिटा देंगे।

हमें बदलना होगा, सरकारों को इस बारे में सोचना होगा, हाल ही में देश की सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह आम जनमानस की पुकार है, हम इसे अनसुना नहीं कर सकते है। हालाँकि कोर्ट ने अपनी विवशता भी और लिमिट भी इस मामले की सुनवाई के दौरान बतायी। सर्वोच्च न्यायायलय ने कहा है कि विधायिका कानून बनाती है और हम केवल उसकी व्याख्या करते है, हालाँकि केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी इस बात को स्वीकार किया है और उन्होंने कहा है कि बिलकुल अब समय आ गया है जब संसद को इसकी समीक्षा करनी होगी।

अब संसद इसकी समीक्षा करता है या फिर नहीं, यह तो समय के गर्भ में छिपा हुआ है, लेकिन आपके हाथ में यह जरूर है कि आप इस मामले पर अपनी राय हमें कमेंट करके बता सकते है और साथ ही अगर इस मामले पर या फिर किसी भी मामले पर आप कोई लेख, कविता कुछ भी लिखते है और आप उसे हमारी वेबसाइट के माध्यम से प्रदर्शित करना चाहते है तो आप हमें 98710 30408 पर व्हाट्स एप कर सकते है या फिर हमें कॉल भी कर सकते है। 

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