विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में फसल उत्पादन पर तय किए गए लक्ष्य

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समस्तीपुर(ब्यूरो)
– डा. राजेद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अब किसानो के हित के लिए कौन सी फसल किस क्षेत्र के लिए उपयोगी है, इस पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है| इससे किसानों की समस्या का काफी निदान होने की संभावना बन गयी है| विश्वविद्यालय के कुलपति डा. आरसी श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य में मक्का उत्पादन बेहतर कैश-क्रॉप के रूप मे उभरा है| वर्तमान में राज्य के 16 स्टेशनों से 5 से 6 सौ रैक मक्का दूसरे राज्य जा रहे है|

उन्होंने कहा कि इसको और अधिक सशक्त बनाने के लिए विश्वविद्यालय में अयोजित दो दिवसीय चिंतन-मंथन कार्यशाला में देश समेत राज्य के कई लक्ष्य तय किए गए हैं, जिसे सरकार के सहयोग से जमीन पर उतारने का निर्णय लिया गया है| तय किए गए लक्ष्यों में अगले पांच वर्षो के अंदर औसत उत्पादन छह टन प्रति हेक्टेयर करने, न्यूट्रिशन को बढ़ावा देना शामिल है| इसके अलावा राज्य में मक्का के वर्तमान में हो रही 7 प्रतिशत की प्रोसेसिंग को बढ़ाकर 30 से 40 प्रतिशत करने समेत महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए है|

पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वर्तमान में राज्य के साढ़े सात लाख हेक्टेयर में करीब 30 लाख टन मक्का का उत्पादन हो रहा है| जिसमें से खाने में महज 23 प्रतिशत मक्का का ही इस्तेमाल हो रहा है| शेष अन्य कार्यों में उपयोग हो रहा है| इसके लिए वैज्ञानिक तकनीकी विकास के साथ, प्रोसेसिंग, सिंचाई, मार्केट, इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत है| उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हर संभव प्रयास होगा|

रिपोर्ट- आर. कुमार
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