डाक विभाग में फर्जी मेडिकल बिल पर करोड़ो की हेरा-फेरी की आशंका

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प्रतीकात्मक

बलिया(ब्यूरो): मुख्य डाकघर समेत जनपद के विभिन्न क्षेत्रों स्थापित उप डाकघरो के कर्मचारियों के नाम पर फर्जी मेडिकल बिल बनाकर करोड़ो रुपयो का डाक विभाग को चूना लगाया गया है।अंदर खाने की बातो पर विश्वास करे विभाग द्वारा अब तक दर्जनों शिकायती पत्रो को दबा दिया गया है।लेकिन अब लगता है कि जाँच की आँच से दोषी बच नहीं पायेगें।क्योंकि तीन माह तक शिकायती पत्र को दबाने के बाद अब जाँच शुरु कर दी गई है।जाँच करने की जिम्मेदारी निरीक्षक डाकघर पुर्वी को मिला है।

प्रधान डाकघर बलिया में काफी दिनों से नियम कानून को ताक पर रखकर सभी विभागों में सरकारी धन का खुलकर बंदर बाट किया जा रहा है।अगर इस मामले में निष्पक्ष जाँच हुआ तो करोड़ो का घपला उजागर होगा।वैसे हमेशा की तरह इस बार भी शिकायती पत्र पर विभाग के सक्षम अधिकारियो के द्वारा मिट्टी डालने का पूरा प्रयास किया गया। विभागीय सूत्रो की माने तो दर्जनों अधिकारी व कर्मचारियों के नाम पर फर्जी मेडिकल बिल लगाकर करोड़ो का भुगतान ले लिया गया है।एक-एक कर्मचारी के नाम पर एक वित्तीय वर्ष में पाँच से दस लाख रुपये का बिल बनाया गया है।ऐसे जनपद में करीब 20 से 25 कर्मचारी है।

खास बात यह है कि जिन कर्मचारियो के नाम पर लाखो का भुगतान लिया गया है।उन लोगों को यह भी पता नहीं की बीमार कब हुये थे और क्या बीमारी थी?कुछ कर्मचारी ऐसे है कि स्वस्थ रहते भी डाक्टरो से मिलकर अस्वस्थ होने का प्रमाण हासिल कर लिया है। फर्जी मेडिकल के आधार पर लाखो रुपये हथिया लिये है ।बहती गंगा में हाथ धोने को आतुर कर्मचारियो को जहाँ भी मौका मिलता भुनाने में पीछे नहीं हटते।
सूत्र बताते है कि शिकायती पत्र मिलने के बाद जाँच की रस्म अदायगी की जाती है।और सक्षम अधिकारी द्वारा दोषी कर्मचारी से मिलकर फाईल दबा दी जाती हैं। विभाग में बर्षो से अयोग्य व भ्रष्ट कर्मचारी अधिकारियो के रहमो करम पर ओहदेदार पद पर आशीन है,और सरकारी रुपयो का दुरुपियोग करने में लीन है।ऐसा नहीं है कि उच्चाधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है,वे भी इस खेल के खिलाड़ी हैं।तभी तो शिकायती पत्रो को दबाने व मामले की लीपा-पोती करने से बाज नहीं आते है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि कार्यालय अधीक्षक डाकघर बलिया ने 26-12-2016 को शिकायती पत्र प्राप्त किया था। जिसमें एक अप्रैल 2011से 31-12-2016 तक के प्रत्येक सम्बन्धित कर्मचारियो के द्वारा लिये गये भुगतान के संबन्ध में जाँच की माँग की थी। लेकिन तीन महीने तक शिकायत कर्ता का ब्यान लेना भी उचित नहीं समझा गया।बिलो की जाँच पड़ताल व दोषियो पर कार्यवाही कितने दिनों में होगी यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है?

रिपोर्ट-सन्तोष कुमार शर्मा

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