क्रेशर संचालक नहीं कर रहे मानक के नियम का पालन


कबरई/महोबा (ब्यूरो) पत्थर नगरी कबरई मे सैकड़ों की संख्या मे क्रेशर प्लान्ट लगे हैं जिनमें पत्थरों के पीसने का कार्य होता है। कई क्रेशर प्लान्ट नेशनल हाईवे के बिल्कुल ही नजदीक भी लगे हैं जो कि नियम के विरुद्ध है लेकिन किसी का इसपे ध्यान नहीं है और कई बडे प्लान्ट रेलवे के नजदीक लगे है और यह भी नियम के विरुद्ध है लेकिन सब ऐसे ही लेदे के चलायमान हैं | इसलिये इनके खिलाफ कोई कठोर कार्यवाही नहीं होती।

इतना ही नहीं क्रेशरो से जो धूल उड़ती है वह नेशनल हाईवे पर बाधा डालती है तथा रेलवे क्रासिंग पर भी इसका असर पड़ता है, क्योंकि क्रेशर संचालक मानक के किसी भी नियम का पालन नहीं करते | जो क्रेशर नेशनल हाईवे व रेलवे के पास है जैसे नई मंडी अलिपुरा व कानपुर सागर राष्ट्रीय राज मार्ग तथा पचपहरा मंडी यह सब रोड किनारे हैं तथा बिल्कुल नजदीक लगे हैं | वह न तो मानक के अनुसार पानी के फव्वारों का प्रयोग करते हैं और न ही क्रेशर प्लान्टो के बाहर बान्ड्री बनवाई गई है, जिससे उठती धूल हाईवे पर छा जाती है और एक तरह से उसी धूल के कारण भी कई बडी दुर्घटना हो जाती है | कई प्लान्ट ऐसी जगह लगे हैं और चलायमान भी है जबकि उनका वहाँ लगना बिल्कुल गलत है लेकिन कहते हैं कि “बाप बड़ा नहीं भईया सबसे बडा रुपइया” यह कहावत बिल्कुल सही कही है और उसी के बल पर सरकार की आंखों मे घूल झोंककर तथा रुपऐ के बल पर चलाया जा रहा है।

शासन सिर्फ आदेश कर देता है कि मानक के सभी नियम का पालन करें लेकिन यह सुनिश्चित नहीं कर पाता कि सब नियम का पालन कर रहे है या नहीं | लोग सही कहते है की हर काम व हर बात को मनाना व बात को दबाना रुपऐ को आता है और वही हो रहा है, इसलिये बिना भय के ये क्रेशर संचालक मानक के किसी भी नियम पालन नहीं कर रहे है। जिससे कई समस्या पैदा होती है। क्या किसी ने इस पर गौर नहीं किया की रेलवे से कितनी दूर व हाईवे से कितनी दूर है क्रेशर प्लान्ट ? इस पर किसी का ध्यान नहीं और हो भी क्यों जब क्रेशर संचालको द्वारा जेब गर्म कर दी जाती है | इसलिए ही तो वह सब प्लान्ट जो नियम विरुद्ध है सब चलायमान है। सही कहा है किसी ने सरकार चाहे किसी की भी हो होता या होना वही है जो जैसे होता रहा है।

रिपोर्ट – प्रदीप मिश्रा

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