दैनीय, आज भी अस्पतालों में मरीजों के साथ होता है खिलवाड़

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बांगरमऊ/उन्नाव (ब्यूरो)- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब्यवस्थाओं से घिरा है । यहाँ पर रोग विशेषज्ञ नहीं है ।सर्जन के आभाव में सर्जरी कक्ष खाली ही पड़ा रहता है ।दवाओं की भी कमीं बनी रहती है । मरीजों को उचित इलाज के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है ।

बांगरमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आज भी लगभग पच्चीस वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वाली ही सुबिधायें उपलब्ध हैं । दर्जा बढ़ा कर यहाँ चिकित्सक तो आठ नियुक्त कर दिए गए लेकिन रोग विशेषज्ञ के नाम पर एक मात्र बाल विशेषज्ञ अधीक्षक डा 0 प्रमोद कुमार दोहरे हैं, लेकिन सभासद अमरेंद्र अवस्थी बताते हैं कि वह अपने आवास में ही बनें रहते हैं और अधीक्षक कक्ष खाली ही पड़ा रहता है ।

मुख्य मार्ग पर अस्पताल होनेँ से यहाँ दिन रात मार्ग दुर्घटना में घायल होकर दर्जनों मरीज आते हैं किन्तु सर्जन न होने से अधिकाँश घायल जिला चिकित्सालय और लखनऊ ट्रामा सेन्टर रिफर कर दिए जाते हैं । सर्जिकल कक्ष में ताला ही लटका रहता है ।

सर्जरी के लिए बीस वर्ष से कोई चिकित्सक नियुक्त नहीं किया जा सका । मामूली से मामूली रोगों व् एक्सीडेंटल घायलों को रिफर कर दिया जाता है । वैसे तो चिकित्सकों के आवास हैं और कुछ चिकित्सक उनमें रहते भी हैं लेकिन आरोप है कि आपात कालीन कक्ष में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं रहता है ।

कक्ष में मरीज तड़फता रहता है और चिकित्सक कमरे में सोते रहते हैं । चिकित्सक के देर से आनें के चलते कई मरीज दम भी तोड़ चुके हैं ।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत हुए पच्चीस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन आज भी दवाओं का कोटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वाला ही चल रहा है । इन दिनों इस अस्पताल में मंहंगी दवाओं की बात कौन करे पैरा सीटा माल ,पेन किलर तथा ओ आर एस घोल के पैकेट तक उपलब्ध नहीं हैं ।

इस कारण तमाम मरीज बाहर से दवाइयाँ खरीदनें को इधर उधर मेडिकल स्टोरों पर भटकते रहते हैं जहाँ उनका जमकर शोषण किया जाता है |

यहाँ पर मौजूद अल्ट्रा साउंड मशीन सम्बंधित चिकित्सक के आभाव में धुल खा रही है । एक्सरे मशीन भी अक्सर बन्द पडी रहती है । अस्पताल में मौजूद जनरेटरों को भी कभी कभार ही चलाया जाता है जिसके कारण मरीजों को बिजली जानें पर हवा और रोशनी की ब्यवस्था स्वयं करनीं पड़ती है ।

रिपोर्ट-रघुनाथ प्रसाद शास्त्री

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