एक और मांझी – जब पत्नी को पड़ोसियों ने अपमानित कर पानी भरने से किया मना तो पत्थरों को फाड़ खोद डाला कुवां

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महराष्ट्र – महाराष्ट्र के वाशिम के रहने वाले बापुराव तजने की कहानी बिहार के माउन्टेन मैंन दशरथ मांझी से अच्छी खासी मेल खाती है | बस फर्क सिर्फ इतना ही है कि जीतन राम मांझी ने अपनी पत्नी की मौत से छुब्ध होकर एक बड़े से पहाड़ का सीना फाड़कर उससे रास्ता बना दिया था | तो वही महाराष्ट्र के वाशिम के रहने वाले बापूराव तजने ने एक पहाड़ का सीना फाड़ करके उसके गर्भ से जल निकाल दिया है | इन दोनों की ही कहानियों में एक बात मेल खाती है कि दोनों ने इसकी शुरुआत अपनी पत्नियों के लिए किया था लेकिन बाद में इन दोनों के द्वारा किये गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दी है |

जहां लोग सरकार की तरफ पानी की एक-एक बूँद के लिए ललचायी नजरों से देख रहे है वहां बापूराव ने जल का श्रोत ही बना दिया –
बापू राव तजने महाराष्ट्र के उस इलाके में रहते है जहां पर इस मौसम में लोग भीषण सूखे की चपेट है | इंशान तो इंशान जानवरों ने भी उन इलाकों को छोड़ना शुरू कर दिया है | कारण सिर्फ एक है वह है इलाके में पानी कि किल्लत बहुत ज्यादा है | पानी की किल्लत की वजह से ही एक दिन बापूराव की पत्नी गाँव के एक पडोसी के कुवें पर पानी भरने के लिए गई लेकिन पडोसी ने उन्हें पानी भरने से केवल इसलिए मना कर दिया क्योंकि वे नीची जाति से थी | वह एक दलित थी इसीलिए ऊँची जाति के लोगों ने उन्हें अपने कुँवें से पानी भरने से मना कर दिया |

मै बहुत रोया था उस दिन –
बापू राम तजने ने कहा है कि जिस दिन मेरी पत्नी को गाँव के ऊंची जाति के लोगों ने पानी भरने से मना कर दिया था उस दिन मै बहुत रोया था | पत्नी का अपमान मै बर्दास्त नहीं कर पा रहा था और न ही अपनी पत्नी और अपमानित होते हुए देख सकता था | गाँव के लोगों से मै किसी भी प्रकार की लड़ाई कभी करना नहीं चाहता था अतः मैंने उस दिन एक कसम खा ली कि आज के बाद मै कभी किसी से कुछ मांगूंगा नहीं | न ही अपनी पत्नी को मांगने के लिए कहूँगा |

उसके बाद शुरू हुई कुवें की खुदाई –
बापुराव तजने ने कहा है कि उसके बाद मै अगले दिन मालेगांव गया वहां से मैंने कुवां खोदने का सारा सामान लेकर आ गया उसके बाद मै रोजान 6 घंटे कुवें की खुदाई करने लगा | बापुराव तजने ने कहा है कि लगतार 40 दिनों तक कार्यक्रम चलता रहा जिसके बाद तक़रीबन 15 फुट की गहराई तक खुदाई करने के बाद जल निकल आया | गाँव के सभी लोग हैरान थे किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि ये अचम्भा कैसे हुआ | जबकि गाँव के आस-पास के कई बोरवेल सूख गए थे कई एक कुवें भी सूख गए थे | लोगों को अचम्भा था लेकिन मुझे भगवान् पर भरोषा था कि ईश्वर ने मेरे विश्वास को मजबूत किया है और मेरी मदद की है |

पड़ोसियों और गाँव वालों ने उड़ाया था मजाक –
बापूराव तजने कहते है कि जब उन्होंने इस कुवें की खुदाई प्रारंभ की थी तब गाँव के लोग यहाँ तक कि उसके पड़ोसियों ने भी उसका मजाक उड़ाया था | लेकिन तजने ने कहा कि उन्होंने कभी किसी के मजाक उड़ाने को ध्यान ही नहीं दिया और निरंतर अपने काम में लगे रहे | उन्होंने कहा है कि वे दिन के 8 घंटे अपने काम पर जाते थे जहां वे मजदूरी करते थे और शाम को काम से वापस आने के बाद वे सीधे कुवें की खुदाई में लग जाते थे | नतीजा अब सभी के सामने है 40 दिन की कठिन मेहनत के बाद बापुराव के कुवें में पानी है और यहाँ न केवल दलित परिवार के लोग ही पानी भरते है बल्कि सभी जातियों के लोग पूरे हक़ से पानी भरते है |

नाना पाटेकर ने फ़ोन कर के दी थी बधाई –
मीडिया में आई रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जब बॉलीवुड के कलाकार और किसानों के उद्धार के लिए काम करने वाले नानापाटेकर ने जब एक मराठी चैनल पर न्यूज़ में इन्हें देखा और इनके बारे में सुना तो उन्होंने भी इन्हें फोन करके बधाई दी है | साथ ही साथ इलाके के कई अधिकारी भी उनके इस जज्बे से बेहद खुश है वे सभी भी इन्हें ईनाम देना चाहते है |

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