बाबा साहब भीमराव अंबेडकर राष्ट्र ऋषि थे, उन्होंने अपमान सहा लेकिन कभी देश छोड़ने की बात नहीं कही – राजनाथ सिंह

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दिल्ली- संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है और साथ ही साथ संसद के भीतर आरोपों और जवाबों का दौर भी शुरू हो गया है I आज संसद के भीतर संविधान दिवस मनाया जा रहा है और इसी संविधान दिवस के अवसर पर संसद में चर्चा हो रही है I

आज चर्चा की शुरुआत करते हुए देश के गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आज हमारी सरकार संविधान की प्रतिबध्ताओं को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है I गृहमंत्री ने चर्चा के दौरान दिए गये अपने भाषण में कहा है कि देश के संविधान ने इस देश को एक दिशा दी है वह दिशा जो देश को सकारात्मकता की ओर आगे ले जाती है I

संविधान के ऊपर बोलते हुए गृहमंत्री ने संविधान निर्माताओं का भी जिक्र किया और उन्हें धन्यवाद भी दिया I गृहमंत्री ने कहा कि इस संविधान के निर्माण में देश के तमाम लोगों ने अपना योगदान दिया है और उन्ही की वजह से भारत में एक संतुलित समाज की स्थापना हो सकी है I राजनाथ सिंह ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के ऊपर बोलते हुए कहा कि बाबा साहब सच्चे अर्थों में राष्ट्र ऋषि थे I उन्होंने कहा कि बाबा साहब को जीवन पर्यंत अपमान का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी भी देश छोड़ने की बात नहीं की और इतना ही नहीं उन्होंने संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य करके इस देश को एक नई दिशा दिखायी है I

सेकुलर शब्द पर भी बोले गृहमंत्री –

आज संसद के शीतकालीन सत्र के प्रारंभ के पहले दिन संसद के भीतर बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा है कि संविधान में सेकुलर शब्द का इस्तेमाल किया गया है लेकिन उन्होंने कहा कि संविधान में इसका अर्थ धर्म निरपेक्ष नहीं बल्कि पंथ निरपेक्ष है और उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि इसी पंथ निरपेक्ष शब्द का प्रयोग होना चाहिए I

संकीर्ण विचारधारा के साथ बाबा साहब का नाम जोड़ना ठीक नहीं –

संसद के भीतर बोलते हुए गृहमंत्री ने कहा है कि बाबा साहब को देश के भीतर जीवन पर्यंत अपमान का सामना करना पड़ा लेकिन कभी भी उन्होंने देश छोड़ने की बात नहीं की है I उन्होंने यहाँ तक कहा कि एक बार वर्तमान की सभी गतिविधियों से तंग आकर बाबा साहब ने यह भी कहा था कि चाहे जो कुछ भी हो जाए लेकिन मै कहबी अपना देश छोड़कर नहीं जाऊंगा और मैं यही रहूँगा तथा जीवन के नैतिक मूल्यों को मजबूत करता रहूँगा I गृहमंत्री ने कहा कि आज देश के भीतर कुछ लोग बाबा साहब को एक दलित ने के रूप में प्रोजेक्ट करते है जो कि बिलकुल ठीक नहीं है I यह एक संकीर्ण विचार धारा है और हमें इसे त्यागना ही होगा I

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