डीएम के प्रति अपशब्द कह छात्र को भगाया

जालौन(ब्यूरो)- राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) उरई के प्रधानाचार्य एमके सिंह ने तब तानाशाही की सारी हदें तोड़ दी जब वहां प्रवेश लेने गये छात्र विभव द्विवेदी पुत्र शिवनारायण द्विवेदी निवासी नया पटेल नगर उरई ने उन्हें जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडैय का इस आशय का आदेश थमाया कि वह निर्धारित शुल्क लेकर उसे प्रवेश दे दें। प्रधानाचार्य ने आदेश को पढ़कर डीएम के लिये तमाम अपशब्द कहे और छात्र से एक कागज पर उल्टा सीधा लिखवा लिया और गाली गुत्ता कहने के साथ उसे आईटीआई परिसर में फिर कभी न घुसने की चेतावनी देते हुये भगा दिया।

आईटीआई उरई में प्रवेशार्थी उक्त छात्र विभव द्विवेदी ने लिखित रूप से बताया कि उसका चयन आईटीआई में प्रवेश हेतु किया गया। जिस पर वह 29 जुलाई 2017 को प्रवेश लेने आईटीआई उरई गया और समस्त आवश्यक दस्तावेज जो प्रवेश के लिये बांछित थे के साथ निर्धारित प्रवेश शुल्क तीन सौ रुपया दिया। जिस पर वहां 15 सौ रुपये मांगे गये। छात्र ने बताया कि उसने कहा कि शुल्क तीन सौ रुपये है तो कहा गया कि कितना रुपया मांगा जा रहा है वह दो तब प्रवेश दिया जायेगा। चाहो तो डीएम से शिकायत कर आओ। इस पर छात्र जिलाधिकारी की जनसुनवाई में प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें डीएम ने प्रार्थना पत्र पर ही निर्धारित शुल्क लेने और अतिरिक्त पैसा न लेने के आदेश आईटीआई प्रधानाचार्य के लिये कर दिये। छात्र 30 जुलाई 17 को इस आदेश के साथ प्रवेश लेने फिर आईटीआई गया। जहां प्रधानाचार्य ने डीएम के लिये कथित रूप से अपशब्द कहे और प्रवेशार्थी छात्र को बुरी तरह से हड़काकर उसे कागज पर फिजूल की बातें लिखवाकर टिप्पणी लिखी कि फीस माफ का कोई प्राधिकार आईटीआई में नहीं है। जबकि छात्र से फीस माफ का कोई अनुरोध नहीं किया था और वह निर्धारित प्रवेश शुल्क तीन सौ रुपये जमा कर रहा था और आईटीआई में प्रवेश देने के लिये उससे 15 सौ रुपये मांगे जा रहे थे।

यहां सवाल यह है कि आईटीआई उरई प्रधानाचार्य एमके सिंह पर विभिन्न निर्मित मदों में छात्रों से मोटी-मोटी रकमों की वसूली के आरोप छात्रों ने लगाये हैं। यह आरोप निवर्तमान जिलाधिकारी रामगणेश तथा संदीप कौर और वर्तमान जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय के सम्मुख भी प्रार्थना पत्र के साथ छात्रों ने कथित रूप से सामने रखे। किंतु छात्रों की शिकायत पर उक्त में से किसी भी जिलाधिकारी ने कोई जांच नहीं की। छात्र विभव द्विवेदी ने भी जनसुनवाई में तीन सौ रुपये प्रवेश शुल्क के स्थान पर 15 सौ रुपये मांगे जाने की शिकायत की किंतु जिलाधिकारी ने उस पर जांच के आदेश करने के स्थान पर सिर्फ इतना लिखा कि निर्धारित शुल्क लेकर प्रवेश दिया जाये।

जिलाधिकारी के इस आदेश का भी अनुपालन नहीं हुआ उल्टे उस पर गाली गुफ्ता ही सामने आया। ऐसे में यह साफ किया जाना चाहिये कि प्रवेश शुल्क तीन सौ रुपये नहीं है तथा अनुसूचित जाति के लिये 12 सौ रुपये और शेष के लिये 15 सौ रुपये जो आईटीआई में लिया जा रहा है वही प्रवेश शुल्क है तथा प्रवेश शुल्क जो आॅन लाइन तीन सौ रुपया लिखा है गलती से अंकित हो गया है। किंतु यह भी साफ नहीं किया जा रहा है कि इस सबसे यह भी जाहिर हो रहा है कि आईटीआई प्रधानाचार्य एमके सिंह को छात्रों से मोटी-मोटी रकमें ऐंठने के लिये अभयदान मिला हुआ है। जिससे किसी भी जिलाधिकारी ने अभी तक छात्रों की पीड़ा का संज्ञान नहीं लिया है। फिलहाल ताजा उत्पीड़ित प्रवेशार्थी छात्र विभव द्विवेदी ने उक्त आशय की शिकायत मुख्यमंत्री उप्र शासन लखनऊ, प्रोद्यौगिकी विकास मंत्री लखनऊ, राजकीय व्यवसायिक प्रशिक्षण परिषद आईटीआई परिसर अलीगंज लखनऊ और जिलाधिकारी जालौन स्थान उरई को बजरिये रजिस्टर्ड पत्र करना बताया है।

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