व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को 50 माइक्रोन पॉलिथीन प्रतिबन्ध के सम्बन्ध में दिया ज्ञापन

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कानपुर (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश में 15 जुलाई 2018 से 50 माइक्रोन के नीचे की प्लास्टिक पॉलिथीन का प्रयोग प्रतिबन्धित कर दिया गया।साथ ही 15 अगस्त से डिस्पोसेबल क्रॉकरी आदि को भी प्रतिबन्धित किया जा रहा है।प्रदेश का प्लास्टिक निर्माता ,थर्मोकोल व डिस्पोसेबल निर्माता,क्रॉकरी निर्माता व सम्बन्धित व्यापारी इस निर्णय से भयंकर रूप से प्रभावित हुआ है।आदरणीय मुख्यमंत्री जी,आपसे कहना चाहेंगे की प्लास्टिक,थेर्मोकोल,डिस्पोसेबल व्यापार का सालाना टर्न ओवर 10000 करोड़ रुपये का है।जीएसटी के रूप में कम से कम 1800 करोड़ का राजस्व सरकार को मिलता है।

साथ ही लगभग 400 करोड़ की बिजली खरीद भी यह वर्ग करता है।इससे लगभग 2200 करोड़ का राजस्व नुकसान प्रति वर्ष होगा। उसके अलावा यह व्यापार लगभग 15 से 20 लाख परिवारों को रोजगार भी देता है और इस बंदी से वो लाखों लोग बेरोज़गार हो जाएंगे।व्यापारी ने बैंकों से लाखों का कर्जा ले रखा है जो कि एनपीए होने की कगार पे आ जाएगा।

1200 करोड़ से ज़्यादा का कर्जा बैंकों का सब व्यापारियों पे खड़ा हो जाएगा।पूरे प्रदेश का व्यापारी त्राहि त्राहि कर रहा है।ज़बरदस्ती पलास्टिक प्रतिबन्ध से कई व्यापारी बर्बाद होंगे व लाखों लोग बेरोज़गार हो जाएंगे ।इससे प्रदूषण कम नहीं बल्कि अपने चरम स्तर तक पहुंच जाएगा क्योंकि कागज़ का जितना इस्तेमाल होगा पेड़ उतने ही काटे जाएंगे और वह प्लास्टिक से ही रोका जा सकता है।प्लास्टिक की सफाई ठीक से न होना ही समस्या है जिसका निवारण प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट से संभव है।प्राकृतिक आपदा के वक़्त यही उत्पाद प्रयोग में आते हैं।

आप हमारे मुख्यमंत्री हैं और प्रदेश के व्यापारियों का दर्द आपको सुन्ना चाहिए।हम आप से ही अपनी समस्या कह सकते हैं।प्लास्टिक,थर्मोकॉल व डिस्पोसेबल निर्माता व व्यापारियों की आपसे निम्न 8 प्रार्थनाएं हैं।

  1. 51 माइक्रोन की पॉलीथीन,डिस्पोसेबल 2 अक्टूबर के बाद बन्द न कि जाए इस बात को सरकार स्पष्ट कर दे ताकि व्यापारी 51 माइक्रोन की पॉलीथीन और डिस्पोसेबल आदि बनाने पे ध्यान दें।अभी व्यापारी को पता ही नहीं की सरकार क्या बंद करना चाहती है क्या चलाना।कौन सा उत्पाद सरकार आगे चलने देगी यह स्पष्ट करने का कष्ट करें।

2. वन नेशन वन जीएसटी के तहत वन नेशन वन बैन लागू हो।51 माइक्रोन से नीचे की पॉलिथीन,डिस्पोसेबल आदि पे प्रतिबंध पूरे देश में समान रुप से लागू हो अन्यथा अकेले उत्तर प्रदेश में लागू न हो।यह न हो कि कुछ जगह या राज्यों में प्रतिबंध हो और कुछ जगह पॉलिथीन या डिस्पोसेबल बिकती रहे।कुछ राज्यों में 50 माइक्रोन से नीचे की पॉलिथीन या डिस्पोसेबल अभी भी वैध है जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश का व्यापारी नुकसान खा रहा है।इसलिए जब तक प्रतिबन्ध पूरे देश में न हो तब उत्तर प्रदेश में भी न हो।यह संविधान में दिए मौलिक अधिकार और समानता के आदर्श के विरुद्ध है।

3. 51 माइक्रोन का प्रतिबंध सबपे लागू हो।चाहे वो कंपनी का माल हो या किसी का भी।किसी भी कंपनी के 51 माइक्रोन से नीचे के माल की बिक्री कतई होने न दी जाए।कई बड़ी चिप्स,बिस्किट,शैम्पू आदि की निर्माता कंपनियों 50 माइक्रोन से कम साइज की पॉलीथीन इस्तेमाल कर रही हैं।पर प्रशासन उनको संरक्षण दे रहा है।छोटे मंझोले व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है।यह नहीं होना चाहिए।यह संविधान में दिए मौलिक अधिकार के विरुद्ध है।

4. प्लास्टिक निर्माता,थर्मोकोल व डिस्पोसेबल निर्माता व्यापारियों द्वारा पहले से ही बन चुके माल को सरकार बेचने की अनुमाति कुछ दिन के लिए दे।महाराष्ट्र सरकार ने अपने व्यापारियों को ऐसे ही कुछ दिन की रियायत दी है।उत्तर प्रदेश सरकार भी कुछ समय दे।नया माल नहीं बनाया जाएगा इसका आश्वासन व्यापारी देता है।व्यापारी जीएसटी,बिजली आदि देकर माल बना चुका है।वो इससे करोड़ों के नुकसान झेलेगा।इसलिए उसको बने हुए माल को बेचने तक का समय दिया जाए।

5. राजगोपालन फॉर्मूला उत्तर प्रदेश में लागू किया जाए।प्लास्टिक पॉलिथीन बैग्स व डिस्पोसेबल का इस्तेमाल रोड बनाने में हो।इससे सस्ती और टिकाऊ रोड बनेंगी।अब तक इस फॉर्मूले पे देश में 1 लाख किलो मीटर से ज़्यादा की रोड बन चुकी हैं।पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस विकल्प की तरफ ध्यान नहीं दिया है।व्यापारियों के कल्याण हेतु इस विकल्प पे विचार करें।थर्मोकोल के वेस्ट से टाइल्स,कपड़े,खाद आदि का निर्माण सम्भव है जिसकी मशीन 500 करोड़ में लग सकती है।

6. व्यापारी आपसे माँग रखते हैं की व्यापारी को खलनायक न बनाया जाए।प्लास्टिक आज भी समाज के लिए कई मायनों में ज़रूरी है यह बात सरकार को जनता में स्पष्ट करना चाहिए।

7. अधिकारियों द्वारा प्लास्टिक कारोबारियों का उत्पीड़न न किया जाए।

8. 50 माइक्रोन से नीचे की पॉलिथीन से प्रदूषण की असली स्तिथि जानने के लिए निष्पक्ष वैज्ञानिक जांच करवाई जाए।

रिपोर्ट- सुरेंद्र कुमार गुप्ता

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