लोगों नें की तालाब व चारागाह बचानें की मांग

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प्रतीकात्मक फोटो

बछरावां/रायबरेली (ब्यूरो)- उच्चतम न्यायायल द्वारा तालाबों को सुरक्षित रखनें के लिए जहां आदेश पारित किये गये है। बछरावां क्षेत्र के तालाब प्रायः विलुप्त होनें की कगार पर पहुंच गये है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आज से 10 वर्ष पूर्व तक अकेले बछरावां कस्बें में करीब 2 दर्जन तालाब थे जो भूमाफियाओं के नजरों में आकर विलुप्त हो गये। तालाबों के स्थानों पर बड़ी-बड़ी बिल्ड़िगें खड़ी हो गयी जो थोड़े बहुत बचे भी हैं वह भी आधे तिहाई पट चुकें है। वह दिन दूर नहीं है जब यह भी विलुप्त हो जायेंगें।

कस्बे कें आलावा ग्रामीण क्षेत्रों की भी यह दशा है। ग्राम सभा देवपुरी के लोगों नें बताया कि उनके ग्राम में गाटा संख्या 766 व 795 सरकारी अभिलेखों में तालाब दर्ज है परन्तु इस तालाब की अधिकांश भाग पर दबंगों का कब्जा हो गया है और तो और गाटा संख्या 226 जो 32 बीघे का है और चारागाह दर्ज है इस पर भी लोगों नें कब्जा कर लिया है।

जानवरों के खड़ें होनें के लिए कहीं भी जमीन नहीं बची। अगर जांच की जाय तो शायद ही कोई ग्राम सभा ऐसी दिखाई पड़े जहां तालाबों पर कब्जा न हुआ होगा। अगर यह स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं है जब क्षेत्र से तालाबों का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जायेगा ।

लगभग डेढ़ दशक पूर्व रायबरेली में तैनात जिलाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव द्वारा तालाबों को संरक्षित करनें का अभियान चलाया गया था। क्षेत्र के कई तालाब माफिया उनकी हिट लिस्ट में परन्तु इन माफियाओं की राजनैतिक पहुंच के चलते उनकों यहां से जाना पड़ गया। क्षेत्रवासियों की मांग है कि पैमाईश करवाकर कस्बे सहित प्रत्येक ग्रामसभा के तालाबों, व चारागाहों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाय और कब्जा धारकों पर कानूनी कार्यवाही की जाय।

रिपोर्ट- राजेश यादव

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