शासन से आम फल पट्टी घोषित होने के बाद भी किसानों को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं

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उन्नाव(ब्यूरो)- नब्बे के दशक से हसनगंज विकास खंड शासन से आम फल पट्टी घोषित होने के बाद भी आम बागान किसानो की मूलभूत सुविधाये दम तोडती नजर आ रही हैं। जिससे सत्रारह हजार हेकटेयर आम बागानो की सिंचाई का संकट बना हुआ है। तहसील की सबसे बडी आसीवन ब्रांच नहर से डेढ दर्जन रजबहा व माइनरो मे धूल उडने से प्यासे बने हुये है।

तहसील के 514 गांवो मे सबसे अधिक हसनगंज विकास खंड मे अस्सी फीसदी किसान आम बागानो पर निर्भर होकर साल भर की रोजी रोटी का जरिया मानते है। आम बागानो मे पूरे साल हाड तोड मेहनत करके आम की फसल के भरोसे रहते है लेकिन विदेशो मे भी हसनगंज क्षेत्र का कलमी आम, दसहरी, चौसा, लखनउवां, बनारसी लगडा, अपनी पहचान बना चुका है। शासन से घोषित आम फल पटटी मे पानी बिजली आदि सुविधाऐ कागजो मे दफन हो गयी है। प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह से किसानो की समासयाओ को भूल चुका है। हसनगंज के पूव प्रमुख सुखवीर सिंह, अमोइया के अशोक अवसथी, वंशीधर, जिंदासपुर के सुरेश चंद्र शुकल, भानपुर के कमल किशोर, प्रमेधिया के जगदीश अवस्थी, गोविंद प्रसाद त्रिवेदी, हसेवा के विजय पाल मनोज सिंह, बिनोद दिवेदी, सूबेदारखेडा के कमलेश सिंह अमर सिंह आदि ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि आम के बौर से लेकर अब तक आम बागानो मे फसल तैयार करने केलिये तीन चार बार कीट नाशक दवाओ की धुलाई की गयी लेकिन क्षेत्र मे नकली दवाओ के चलते किसान ठगी का शिकार हो रहे है।

जिस तरह फसल तैयार होनी चाहिये नही हुई। जिससे इस बार आम की फसल कम होने का अनुमान किसान लगा रहे है। तहसील की सबसे बडी आसीवन ब्रांच मे पानी न आने से डेढ दर्जन रजबहा व माइनरो मे धूल उड रही है। किसानो की माने फसल बचाना तो दूर पेडो को बचाना गमियो मे मुशिकल हो गया है। अधिकारी भी धयान नही दे रहे है।जिस पर किसानो ने अपनी पीडा को मुख्यमंत्री से आम फल पटटी की सुविधाओ को लागू कराने की मांग की है।

रिपोर्ट- राहुल राठौर 

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