आखिरकार आइंस्टीन की कही बात हुई सच साबित, वैज्ञानिकों ने खोज ही लिया गुरुत्त्वकर्शी तरंगे

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वाशिंगटन- अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने भौतिक और खगोल विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण खोज की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, उन्होंने आखिरकार गुरुत्वाकर्षी तरंगों का पता लगा लिया है, जिसकी भविष्यवाणी प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक सदी पहले ही कर दी थी।

इन तरंगों का सबसे पहले पता 12 सितम्बर 2015 को पता चला। इस खोज को “LIGO” नाम के प्रयोग के द्वारा पता लगाया गया है। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के खोज के बाद इस दिशा में बेहद अहम शोध है। यूरोप में एक संयुक्त प्रेस कांफ्रेस के दौरान वैज्ञानिकों ने कहा कि आइंस्टीन के लगभग सभी सिद्धांत प्रयोगों के द्वारा सत्यापित की जा चुकी थी, सिर्फ एक सिद्धांत का प्रयोगों द्वारा सत्यापन नहीं हो पाया था – “वो गुरुत्व तरंगों का अस्तित्व”। आज वैज्ञानिकों ने इन गुरूत्व तरंगों को साबित कर दिया। न्यूटन के सिद्धांतों से इतर आइंस्टीन का दिया गया यह बेहद अहम सिद्धांत आज प्रयोग के द्वारा सत्यापित हो गया।

अनुसंधान में भारतीय संस्थान रहे शामिल
गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज के लिए महत्वपूर्ण परियोजना में भारतीय वैज्ञानिकों ने डाटा विश्लेषण सहित काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंस्टिट्यूट ऑफ प्लाजमा रिसर्च गांधीनगर, इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनामी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए( पुणे और राजारमन सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलाजी इंदौर सहित कई संस्थान इस परियोजना से जुड़े थे।

गुरुत्वाकर्षी तरंगों की खोज की घोषणा आईयूसीएए पुणे और वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में वैज्ञानिकों ने समानांतर रूप से की। भारत उन देशों में से भी एक है, जहां गुरुत्वाकषर्ण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय वैज्ञानिकों के शामिल होने पर की सराहना –
इन तरंगों की खोज से संबंधित परियोजना में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘अत्यधिक गर्व है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने इस चुनौतीपूर्ण खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।’

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