विकास की परछाई से कोषों दूर हैं, तीन विधानसभाओं के सीमांत गाँव 

0
155


चाँदमारी-वाराणसी : विधानसभा चुनाव की तारीखें जब से घोषित की गयी हैं तब से हर नेता और हर दल कुछ न कुछ चुनावी घोषणाएँ करने में लगे हैं l कोई विकास का डंका पीत रहा है तो कोई शहर को क्योटो बनाने के ख्वाब दिखाने में लगा है l हर तरफ़ बस मतदाताओं को लुभाने की कवायद चल रहीं है l जहाँ सियासी दल विकास की बातें करते नहीँ अघा रहे वहीं वाराणसी जनपद के कुछ ऐसे भी गाँव हैं जहाँ आज तक विकास रूपी रेल की परछाई तक नहीँ पहुँची l जी हाँ जनपद की अजगरा,पिन्डरा और सेवापुरी तीनो विधानसभा क्षेत्रों के सीमांत गाँवों में आज तक विकास के नाम पर एक ढ़ेला भी खर्च नहीँ किया गया और न ही जन प्रतिनिधि ही इन क्षेत्रों में जाने की इच्छा रखते हैं l

अब ये इन गाँवों के मतदाताओं और जनता का दुर्भाग्य ही कहेंगे की वे हर बार चुनाव के दौरान अपने नेता का चुनाव बड़े ही उत्साह से करते हैं की नेता जी जीतकर उनके गाँव का विकास करेंगे लेकिन चुनाव बाद उन्हें हर बार सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है l जब इन गाँवों की पड़ताल की गयी तो पता चला की कई गाँवों में तो जाने के लिये ढंग की सड़क भी मयस्सर नहीँ है कच्ची सड़क है भी तो टूटी फूटी जहाँ बरसात के मौसम में चलना दूभर हो जाता है वहीं पानी की समस्या भी मुँह बाये खड़ी है l अजगरा विधानसभा क्षेत्र के आखिरी छोर पर बसे इशीपुर गाँव तक पहुँचने के लिये रोड तो है लेकिन गाँव में जाने के लिये पक्की सड़क का घोर अभाव है l गाँव के निवासियों का कहना है की बरसात के मौसम में घर से बाहर निकलने के लिये सौ बार सोचना पड़ता है l यह गाँव वरुणा नदी के तट पर बसा है यहाँ के कई बस्तियों में बिजली,पानी एवं सड़क की किल्लत साफ देखी जा सकती है वहीं पिन्डरा विधानसभा के अन्तर्गत इसी गाँव से लगे फत्तेपुर के ग्रामीणों का भी यही रोना है l

फत्तेपुर गाँव में भी जगह जगह सड़क है ही नहीँ स्थानीय लोगों का कहना है की चुनाव बाद विधायक जी क्षेत्र में आना पसंद नहीँ करते और यदि आ भी जायें तो आम जनता उन तक नहीँ पहुँच पाती l इस गाँव में भी बुनियादी सुविधाओं का अकाल है तो इन दोनों ही गाँवों के सरहद से लगती हुईं वरुणा नदी के उस पार पहुँचते ही शुरू होता है सेवापुरी विधानसभा का आखिरी गाँव राखी नेवादा l देखा जाय तो इस गाँव ने देश का प्रधानमंत्री चुना है तो साथ ही यहाँ के विधायक भी राज्य सरकार में मंत्री हैं लेकिन इस गाँव में मानो विकास रूठ सा गया है l गाँव में न तो सड़क है और नही बिजली l स्थानीय लोगों का कहना है की निजी तौर पर कुछ लोगों की मदद तो स्थानीय विधायक ने की है लेकिन गाँव के लिये कुछ नहीँ किया l गाँव के बाहर भगवान शिव और मां दुर्गा का एक भव्य मंदिर है लेकिन उस मंदिर तक जाने के लिये सड़क नहीँ है लोग मंदिर तक जाने के लिये खेतों की मेंड़ों का सहारा लेते हैं l

देखा जाय तो जहाँ दुनियाँ 21वीं सदी में पहुँच गयी, लोग चाँद और मंगल पर जाने के सपने देखते हैं तो वहीं इन गाँवों के लोग आज भी बिजली सड़क और पानी जैसे बुनियादी सुविधाओं को पाने के लिये तरसते हैं l ऐसा नहीँ है की इन क्षेत्रों के जन प्रतिनिधि विकास करने में सक्षम नहीँ लेकिन  इच्छाशक्ति के अभाव के कारण यहाँ विकास की पक्षी अभी तक अपना डेरा नहीँ जमा सकी है l जबकि जहाँ नेवादा गाँव वाराणसी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है और वहाँ के सांसद नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और विधायक सुरेन्द्र पटेल प्रदेश सरकार में पी डब्ल्यू डी मंत्री हैं l लोग प्रधानमंत्री पर तंज़ कसते हैं की वे काशी को क्योटो बनाने का सपना तो दिखा रहे हैं लेकिन गाँव की सड़को को नहीँ बनवा रहे वहीं विधायक पर कुछ ने आरोप लगाया की जाती पूछकर काम कराते हैं l इशीपुर गाँव चंदौली लोकसभा क्षेत्र में आता जहाँ से सांसद महेंद्र नाथ पाण्डेय केंद्र सरकार में मंत्री हैं लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनके दर्शन तक नहीँ हुए वहीं विधायक त्रिभुवन राम का नाम तो जानते हैं लेकिन उन्हें पहचानते नहीँ l मजे की बात तो ये हैं की फत्तेपुर गाँव के लोग अपने सांसद का नाम भी नहीँ जानते जबकि यह गाँव मछलीशहर लोकसभा के अन्तर्गत आता है और यहाँ के सांसद राम चरित निषाद केन्द्र में सत्ता पक्ष की नुमाइंदगी करते हैं वहीं लगभग 20 वर्षों से विधायक अजय राय भी इस गाँव में कुछ भी नहीँ करा सकें l इन गाँवों में कुल मिलाकर लगभग 5 से 6 हजार वोटर आते हैं फिर भी ये गाँव उपेक्षित पड़े हैं l जहाँ इन गाँवों में चलने के लायक सड़क नहीँ हैं,कई बस्तियां बरसात में टापू बन जाती हैं,जहाँ अभी तक कोई प्रत्याशी चुनाव प्रचार के लिये नहीँ पहुँचा है वहीं अब देखना यह है की क्या इस चुनाव में जन प्रतिनिधियों की नज़र इन गाँवों की ओर घूमती है और यहाँ विकास की भूखी जनता की भूख मिटती है या अभी और इंतजार करना लिखा है यहाँ के ग्रामीणों के नसीब में ये तो समय के गर्भ में है

क्या कहते हैं यहाँ के लोग
इन गाँवों के निवासियों ने अपने नेताओं से जहाँ विकास की उम्मीद छोड़ चुके हैं वहीं कुछ लोगों का कहना है की चुनाव के समय तो नेता खूब भाषण देते हैं और विकास के बड़े बड़े वादे करते हैं लेकिन चुनाव बीतते ही वे लोग गाँव का रास्ता ही भूल जाते हैं ऐसे में विकास कैसे होगा l कितनों का कहना है की चुनाव में तो नेता जी खूब पहचानते हैं और उसके बाद बताने पर भी नहीँ पूछते l

इशीपुर के बी ए फाइनल के छात्र प्रदीप यादव कहते हैं की हम लोगों का गाँव विकास कार्यों से बहुत दूर है विधायक चुनाव में दिखे थे और अब फिर चुनाव में ही दिख रहे हैं l इशीपुर के ही शिवधनी यादव का कहना है की विधायक को आज तक देखा नहीँ गाँव में न तो सड़क है और न ही पानी ऐसे में हम क्या विकास की बात करें,बरसात में गाँव टापू बन जाता है l

फत्तेपुर के अनिल कुमार का कहना है की गाँव में विकास के नाम पर विधायक ने कुछ नहीँ किया क्षेत्र में आते हैं तो उनसे मिलना मुश्किल होता है वहीं अपने सांसद को देखा तक नहीँ l फत्तेपुर के ही शोभनाथ यादव कहते हैं की विधायक ने गाँव में केवल एक नाला बनवाये हैं जबकि सड़क और धार्मिक स्थल पूरी तरह से उपेक्षित हैं l

नेवादा के अनिल दीक्षित का कहना है की विधायक ने निजी तौर पर कइयों की मदद की लेकिन गाँव में विकास का कोई भी कार्य नहीँ कराये ,गाँव में बिजली और सड़क का घोर अभाव है नेवादा के ही बुजुर्ग लल्लू राम का कहना है की लोहिया गाँव होने के बाद भी गाँव में विकास नहीँ हुआ विधायक के पास काम के लिये जाने पर जाति पूछकर टरका देते हैं l

रिपोर्ट–नागेन्द्र यादव

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY