कृष्ण लीला मंचन को देख मन्त्र मुग्ध हुए दर्शक

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फतेहपुर चौरासी उन्नाव : हजारी बाबा कुटी पर चल रहे ज्ञानयज्ञ सप्ताह के तहत कलाकारों ने आज बीती रात भगवान कृष्ण के जन्म की लीला का मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जन्मोत्सव पर कलाकारों द्वारा पेश की गई भगवान कृष्ण की झांकियों ने वहां मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया ।

बताते चलें कि फतेहपुर चौरासी ग्रामीण ग्राम पंचायत की ओर से हजारी बाबा कुटी देवस्थान पर ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है ।जिसके तहत दिन में श्रीमद् भागवत कथा का प्रवचन और रात को मशहूर कलाकारों द्वारा श्रीकृष्ण की मनोहारी लीलाओं का मंचन किया जा रहा है ।आज बीती रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की लीला का मंचन किया गया ।जिसमें दिखाया गया कि राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह जब हुआ तो देवकी का भाई कंस बड़ी प्रसन्नता और खुशी के साथ अपनी बहन की विदाई कर रहा था। तभी अचानक आकाशवाणी हुई कि रे कंस आज जिस खुशी के साथ तू अपनी बहन की विदाई कर रहा है इसी बहन की आठवीं संतान तेरा काल होगी। इसपर कंस कुपित हो गया और अपनी बहन देवकी तथा बहनोई वासुदेव को कारागार में डाल दिया।

कारागार में जब पहली संतान हुई तो कारागार के रक्षकों ने कंस को सूचना दी ।कंस उस संतान को मारने के लिए बढ़ा तो बासुदेव और देवकी ने उससे प्रार्थना की कि आपका दुश्मन तो हमारी आठवीं संतान है। इस बेकसूर संतान को क्यों मारोगे। हम आपको अपनी स्वेच्छा से अपनी आठवीं संतान दे देंगे ।तो वह मान गया और उसने देवकी की पहली संतान वापस कर दी।लेकिन जब वह राजमहल में गया तो देव ऋषि नारद ने आ करके उसको समझाया और एक चक्र बनाकर बताया कि इस चक्र की 8 लाइनें हैं बारी-बारी से हर लाइन को गिननें से हर लाइन आठवीं हो रही है। इसी तरह पता नहीं कौन सी संतान आठवीं हो जाए और वो तेरा काल बनकर तेरे सामने खड़ी हो जाए। यह बात उसकी समझ में आ गई और वह तुरंत फिर कारागार गया और बहन की गोद से पहली संतान को छीन कर जमीन पर पटक कर मार डाला ।

देवर्षि नारद ने समाज को बताया कि जितनी जल्दी जल्दी यह अपने पापों का घड़ा पूरा कर लेगा इतनी जल्दी ही इस पापी का अंत हो जाएगा। कंस के पापों से पूरी धरती त्रस्त हो चुकी थी ।उसने एक एक करके देवकी के छह संतानों का वध कर दिया । सातवीं संतान गर्भ से ही दूसरी जगह पहुंच गई । जब आठवीं संतान होने वाली हुई तो कंस ने कड़ा पहरा कारागार के आसपास लगा दिया । और भादौं मास की अष्टमी को जब भगवान विष्णु कृष्ण के रूप में कारागार में अवतरित हुए तो कारागार के सारे पहरेदार सो गए। बन्द सभी ताले खुल गए । भगवान् नें अपनी माता देवकी व पिता बासुदेव को दर्शन देकर उनसे आग्रह किया कि वह उन्हें गोकुल पहुंचा दे और वहां जो कन्या है उसको ले आओ वसुदेव ने ऐसा ही किया। जब कन्या ला करके पुनः जेल में आ गए तो फिर उसी तरह जेल के ताले बंद हो गए और पहरेदार सजग हो गए। कारागार के अंदर बच्चे की रोने की आवाज सुनते ही रक्षकों ने कंस को जाकर के सूचना दी। कंस दौड़ा-दौड़ा मौके पर आया और उसने जैसे ही कन्या को मारने के लिए हाथ में लिया तो वह कन्या हाथ से छूट गई और आकाश में पहुंचकर उसने आकाशवाणी की दुष्ट कंस तेरा मारने वाला तो गोकुल में पैदा हो चुका है । जन्म की लीला के दौरान कलाकारों ने भगवान कृष्ण की कई मनोहारी झांकियां पेश की। जिससे वहां मौजूद दर्शकों नें उन झांकियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। आज की लीला में संडीला से आए मंसाराम ने कंस की भूमिका अदा की। कानपुर के विनीत अवस्थी ने वसुदेव व रामनाथ ने देवकी की भूमिका अदा की।

रिपोर्ट – रघुनाथ प्रसाद

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