भक्तों ने रामकथा का उठाया पूर्ण आनंद

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बबुरी/चन्दौली (ब्यूरो)- स्थानीय कस्बे के पोखरे पर स्थित शिव मंदिर के प्रांगड़ में शिवकृपा श्री राम कथा समिति की तत्वाधान में चल रहे नौ दिविशिय संगीतमय श्री रामकथा के अष्टम दिवस की कथा में में अयोध्या से पधारे कथा वाचक श्री रत्नेश जी महाराज ने भरत के चरित्र पर प्रकाश डाला ।

आचार्य बर ने बताया कि राम के वन जाने के वियोग में महाराज दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए तब गुरुदेव वशिष्ठ व मंत्री जनों ने मिलकर कहा कि कैकई देश में तुरंत दूत भेजकर भरत को बुलाना चाहिए। और दूध को आज्ञा दिया कि वह भरत से कुछ भी ना बताए वह केवल इतना भी कहेगा कि गुरुदेव ने भरत को तुरंत बुलाया है दूत जाकर भारत को गुरुदेव का संदेश सुनाएं और अयोध्या चलने को कहा जब भरत अयोध्या की सीमा में प्रवेश करते हैं तो देखते हैं कि हर समय दीप्तिमान रहने वाली अयोध्या में मरघट सा सन्नाटा क्यों है यह सोच कर उनका दिल विचलित हो जाता है जब वे महल में पहुंचते हैं तो सीधे अपने पिता के कमरे में जाते हैं वहां उन्हें ना पाकर भैया राम वह पिता को ढूंढते हुए अपनी माता केकई के भवन में जाते हैं| इस तरह से महाराज ने अयोध्याकाण्ड का पाठ सुनाया साथ ही उसका मर्म भी श्रधालुओं को समझाया |

कथावाचक महाराज रत्नेश जी द्वारा भरत चरित्र की इतनी मार्मिक प्रस्तुति दी गई कि वहां उपस्थित सभी श्रद्धालु भक्तजनों की आंखें नम हो गई। कथा में राजनरायन जायसवाल , डॉक्टर शम्भूनाथ जिला पंचायत सदस्य, पुल्लू सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता एडोवेकेंट,सारनाथ तिवारी छोटे लाल केसरी , अजय मोदनवाल,सोमारू मौर्या,गोलू तिवारी,नारायण जायसवाल, महेंद्र सेठ,हरिश्चन्द्र पटवा, इत्यादि सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे ।

रिपोर्ट- रोहित वर्मा

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