धृतराष्ट्र बना प्रशासन, दाने-दाने के लिए मोहताज है विधवा वृद्धा

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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)- धृतराष्ट्र बना प्रशासन और सूबे में जरूरतमंद दाने-दाने के लिए मोहताज है | दरअसल आपको बता दें कि प्रशासन को धृतराष्ट्र इसीलिए कहा जा रहा है क्योंकि दुनिया भर की सरकारी योजनाओं का लाभ आज उन्हें ही मिल रहा है जिनकी पहुँच अधिकारियों तक है या फिर जो चाटुकारिता कर सकते हो लेकिन जिसके पास इनमें से कुछ न हो उसका इस देश और समाज में कोई नहीं होता है यह बात स्पष्ट हो चुकी है |

आपको बता दें कि जिले के मांधाता ब्लॉक की इस महिला की कहानी भी कुछ इसीप्रकार है | इनके पति की म्रत्यु तकरीबन 12 वर्ष पहले हो चुकी है अब घर की सभी जिम्मेदारियां इन्ही बूढी और कमजोर हो चुकी कलाइयों पर है | परिवार में इनकम का कोई भी ठीक-ठाक श्रोत नहीं है और न ही कोई सरकारी मदद ही जिसके भरोसे कुछ हो सके | इनके तीन बच्चे है जिनमें से एक मंदबुद्धि है जो और कभी-कभी घर छोड़कर चला जाता है जिसकी वजह से और पूरा घर परेशान होता है |

जमीन पर भी दबंगों ने कर रखा है कब्जा-
बताया जा रहा है शशि मिश्रा की जो जमीन है थोड़ी बहुत उस पर भी गाँव के ही दबंगों ने कब्ज़ा का रखा है | इन्हें हर एक गरीब की तरह से सरकारी लाल कार्ड मिला हुआ है बस अब यही इनके जीने का एकमात्र सहारा है | हालाँकि लाल कार्ड, पीले कार्ड, सफ़ेद कार्ड की असलियत से आप भी वाकिफ ही होंगे | दरअसल ऐसा व्यंग इसीलिए करना पड़ा है क्योंकि जिस प्रदेश या जिस देश में राशन कार्ड बनाने और बनवाने में ही धांधली होती वहां राशन कितना और कब मिलता होगा यह तो ईश्वर ही जानता होगा |

बारिस की हर बूँद खुद के ऊपर लेने पर मजबूर है ये बूढी हड्डियाँ-
बता दें कि वर्षों पहले पुरखों द्वारा बनवाया गया एक घर तो काल चक्र के प्रभाव के कारण अब अपनी अंतिम साँसे ले रहा है | नतीजा यह सामने है कि पिछले कई वर्षों से होने वाली बारिश और मौसम की हर मार अब यह बूढी हड्डियाँ खुद पर ही झेलने पर मजबूर है | अब यदि बात आर्थिक इनकम की करें तो आज इनकी आर्थिक इनकम का एक मात्र सहारा है सरकार की तरफ से मिलने वाली वृद्धा पेंशन, जिसके भरोषे यदि आप जिंदगी गुजारना चाहे तो मुझे लगता है कि शायद वह पाने वाले के मरने के बाद ही आये, तो ऐसे में यह परिवार जीवन कैसे गुज़ार रहा होगा इसका बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है क्योंकि महसूस करने की ज़हमत तो शायद हम उठाने वाले है ही नहीं |

इनसे अधिक शायद और किसी को क्या जरूरत होगी –
इतनी बुरी परिस्थिति के बावजूद आज तक इन्हें सरकारी सुविधाओं के नाम पर यदि कुछ मिला है तो बस मात्र एक लाल कार्ड और एक विधवा पेंशन दोनों की ही सच्चाई से हम पहले ही अवगत हो चुके है कि मनुष्य के जीवन में इनकी कितनी महत्ता है और यह कितना विलासिता पूर्ण जीवन हमें दे सकते है |

लेकिन कहते है न कि हिन्दुस्तानी आशावादी होते है और उनमें भी यदि बात एक माँ की हो तो शायद वह अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए पूरी जिंदगी टकटकी लगाए सूर्य को भी देख सकती है | ठीक इसी तरह इस माँ को भी सरकारी आवास इत्यादि सुविधाओं की आशा है | इन्हें आशा है कि एक न एक दिन सरकार का ध्यान इनकी तरफ भी जाएगा और तब शायद इनके पास भी खाने के लिए अन्न के कुछ दाने और रहने के लिए एक गरीबखाना बन सके |

रिपोर्ट- अवनीश कुमार मिश्रा

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