दिव्यांग बच्चों ने पेश की मिसाल

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रायबरेली (ब्यूरो) विकास खण्ड डीह के ग्राम कचनावा निवासी दिव्याॅग कमल व ग्राम पीढ़ी के दीपक ने यह साबित कर दिखाया कि अक्षमता योग्यता में बाधक नही हो सकती, दृष्टिबाधित कमल व दीपक ने अपनी सफलता की जो कहानी लिखी है वह सामान्य बच्चे के बस की बात नही है।

दोनो दिव्यांग कमल व दीपक अपनी योग्यता से अपने क्षेत्र मे चर्चा का विषय बन गये हैं। न तो बच्चांे के गांव का माहौल उतना अच्छा है और न ही परिवेश, इन सब चुनौतियों को मात देते हुए इन दिव्याॅग बच्चों ने जो योग्यताये अर्जित की है वह हर बच्चे के लिए चुनौती का विषय बन गया है। इन बच्चांे ने परिषदीय विद्यालय में ही पढ़कर जो महारथ हासिल की है वह एक मिशाल बन गयी है। दिव्याॅग कमल को 54 तक पहाड़ा, फोन नंबर याद रखना, सामान्य जानकारी आदि उनके बायें हाथ का खेल है। वहीं दृष्टिबाधित दीपक को 25 तक पहाड़ा, सामान्य ज्ञान, फोन नंबर याद रखना, ब्रेल का लिखित व मौखिक ज्ञान है। अपनी इसी काबिलियत के कारण ये बच्चे क्षेत्र में चर्चा में बने हुये है। ग्रामीणों ने बताया कि अभिभावक भी बहुत कम पढ़े-लिखे हैं। इन दिव्याॅग बच्चो को शिक्षित प्रशिक्षित करने के लिए वि.खंड स्तर पर 1 या 2 विशेष शिक्षक जिला बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित समेकित शिक्षा इकाई के अन्तर्गत नियुक्त गये है। ये विशेष शिक्षक परिषदीय विद्यालयों मे दिव्याॅग बच्चो को चिन्हित करके उन्हे शैक्षिक सपोर्ट प्रदान करते हैं। इन शिक्षको को राज्य परियोजना निदेशालय से यह आदेश है कि एक दिन मे 2 से 3 विद्यालयों मे जाकर दिव्यांग बच्चों को शैक्षणिक सपोर्ट प्रदान करें।

रिपोर्ट – राजेश यादव

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